3 Or More Hours A Day Of Social Media Use Hurts Youths’ Mental Health – 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का उपयोग युवाओं को बना रहा मानसिक रूप से बीमार

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3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का उपयोग युवाओं को बना रहा मानसिक रूप से बीमार
-12 से 15 साल के किशोर-किशोरियां सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा समय बिताते हैं जो शारीरिक परेशानियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है

युवाओं में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और ऐसे ही दूसरे माध्यमों पर लगातार नजरें गढ़ाकर बैठे रहना रुटीन बन गया है। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह समय बिताने से युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। अमरीका की जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की जेएएमए मनोरोग (जामा साइकिएट्री) में हाल ही प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक ३ या इससे ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताने वाले युवाओं को अन्य लोगों की तुलना में मानसिक रोग संबंधी परेशानियों का सामना होने की आशंका ज्यादा होती है।

3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का उपयोग युवाओं को बना रहा मानसिक रूप से बीमार

12 से 15 साल के युवा प्रभावित
शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि 12 से 15 साल की उम्र के ऐसे किशोर-किशोरियां जो प्रतिदिन 3 घंटे से ज्यादा का समय सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉम्र्स पर अपना समय बिता रहे हैं उनमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार ज्यादा देखने में मिले। ऐसे बच्चों में अवसाद, चिंता, अकेलापन, आक्रामकता या असामाजिक व्यवहार की आशंका ज्यादा थी। इनकी तुलना में सोशल मीडिया पर कम समय बिताने वाले किशोर-किशोरियों में इसके लक्ष्ण कम थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि जैसे-जैसे युवाओं का सोशल मीडिया का समय बढ़ता गया, वैसे-वैसे उनका जोखिम भी बढ़ता गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया पर प्रतिदिन छह घंटे से अधिक समय बिताने पर इन समस्याओं से जूझने वालों की आशंका चार गुना अधिक हो जाती हैं।

3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का उपयोग युवाओं को बना रहा मानसिक रूप से बीमार

31 फीसदी किशोर ऐसा करते
अनुसंधान में भाग लेने वाले 6595 अमरीकी किशोरों में से 17 प्रतिशत ने कहा कि वे सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। जबकि 32 प्रतिशत ने हर दिन 30 मिनट या उससे कम का उपयोग करना स्वीकारा। इसी तरह 31 फीसदी ने कहा कि वे 30 मिनट से 3 घंटे तक और 12 प्रतिशत ने तीन से छह घंटे तक सोशल मीडिया से चिपके रहने की बात मानी। जबकि 8 प्रतिशत ऐसे थे जो एक दिन में छह घंटे से अधिक समय विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बिता रहे थे।

3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का उपयोग युवाओं को बना रहा मानसिक रूप से बीमार

अध्ययन में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सोशल मीडिया ही मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से क्यों जुड़ा हुआ है। लेकिन शोधकर्ताओं को संदेह है कि लगातार नींद को दरकिनार कर मोबाइल और लैपटॉप पर चिपके रहने के कारण नींद की समस्या हो सकती है जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को बढ़ावा देती है। वहीं साइबरबुलिंग का खतरा भी होता है जो अवसाद के लक्षणों में एक प्रमुख कारण है। सोशल मीडिया पर लोगों की जीवनशैली और खुशनुमा तस्वीरें देखकर हम दूसरों के साथ अपने जीवन की तुलना करने लगते हें जो अंतत: अवसाद का कारण बन जाता है। हमारी लाइफ स्टादल को देखकर ऐसा ही दूसरों के साथ भी होता है।

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