AGR Dues Case, 3.36 Cr Voda Idea Connections Will Be ‘Out Of Service’! – क्या सरकार के फैसले से Voda Idea के करीब 30 करोड़ मोबाइल हो जाएंगे ‘Out of Service’?

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नई दिल्ली। सितंबर 2018 का वो ऐतिहासिक दिन जब वोडाफोन और आईडिया ने टेलीकॉम मार्केट में कब्जा अपना मोनोपॉली स्थापित करने के लिए आपस में मर्जर किया था। दोनों कंपनियों के एक हो जाने से बनी नई कंपनी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई थी। तब लगा था कि नई कंपनी के आने से टेलीकॉम इंडस्ट्री में नई क्रांति होगी। तब किसी को नहीं पता था कि डेढ़ साल के अंदर कंपनी के एक दो तिहाई यूजर्स छोड़कर चले जाएंगे। किसी को नहीं पता था कि यह कंपनी एक बड़े कर्ज में दब जाएगी, तब इस बात की भी किसी को भनक नहीं थी कि डेढ़ साल में कंपनी अपनी अंतिम सांसे गिन रही होगी। एजीआर ना चुकाने के बाद अब सरकार के पास एक ही तरीका बचा है अपना रुपया वापस लेने का। अगर सरकार ऐसा करती है तो करीब देश के करीब 30 करोड़ मोबाइल कनेक्शंस ‘‘Out of Service’ हो जाएंगे। ऐसे में कंज्यूमर क्या करेंगे? कंपनी का क्या होगा? पढि़ए पूरी रिपोर्ट…

एजीआर के बकाए में फंसी है Voda Idea
सुप्रीम कोर्ट ने किसी तरह के राहत ना देने की बात कर वोडा आईडिया के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। 17 मार्च से पहले कंपनी को पूरा बकाया चुकाना ही होगा। वोडा आईडिया को एजीआर के रूप में 53 हजार करोड़ रुपए चुकाने हैं। जबकि कंपनी के सेल्फ असेंसमेंट में बकाया 18 से 23 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं है। वहीं कंपनी को लगातार घाटे के दौर से भी गुजरना पड़ रहा है। दिसंबर 2019 तक कंपनी के पास कैश और रिज़र्व कुल 25 हजार करोड़ रुपए था। खास तो ये है कि पर कुल कर्ज 1.2 लाख करोड़ रुपए का है।

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बैंक गारंटी भुनाने पर बंद हो सकती है कंपनी
वास्तव में जब कंपनियों की ओर से टेलीकॉम लाइसेंस लिया गया था, तब कंपनियों की ओर से टेलीकॉम डिपार्टमेंट को बैंक गारंटी दी गई थी। लाइसेंस फीस और बाकी ड्यूज ना चुकाने पर टेलीकॉम डिपार्टमेंट इस गारंटी का इस्तेमाल कर सकता है। अब यही स्थिति वोडाफोन और आइडिया के लिए भी पैदा हो गई है। कंपनी के पास कर्ज चुकाने के लिए बिल्कुल भी रुपया नहीं है। कंपनी समय मांग रही है, जो मिल नहीं रहा है। ऐसे में दूरसंचार विभाग बैंक गारंटी भुनाकर अपना बकाया वसूलता है तो कंपनी पर ताला लग सकता है। इसके लिए विभाग की ओर से कानून मंत्रालय की ओर से राय मांगी गई है। वहीं दूसरी ओर वोडाफोन आईडिया की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी का कहना है कि अगर विभाग बैंक गारंटी को भुनाता है तो कंपनी बंद हो जाएगी। ऐसे में सभी को समझदारी से काम लेने की जरुरत है।

क्या बंद हो जाएंगे करीब 30 करोड़ नेटवर्क बंद?
अब जब वोडाफोन आईडिया के बंद होने के कयास लगाए जा रहे हैं तो उन यूजर्स का क्या होगा जो कंपनी का नेटवर्क इस्तेमाल कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2018 में वोडाफोन और आईडिया के मर्जर के बाद बनी नई कंपनी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई थी। उस समय कंपनी के पास कुल यूजर्स की संख्या 40 करोड़ से ज्यादा हो गई थी। ताजा आंकड़ों के अनुसार कंपनी के कुल यूजर्स संख्या में 10 करोड़ से ज्यादा की कटौती हो चुकी है।

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बैंकों को होगा बड़ा नुकसान
वहीं दूसरी ओर वोडाफोन आईडिया के बंद होने से पहले से ही बदहाल हो रहे बैंकिंग सेक्टर को भी बड़ा नुकसान होगा। जिन बैंकों ने कंपनी को कर्ज दिया है वो डूबने के आसार बढ़ जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार एसबीआई ने कंपनी को 11,200 करोड़ रुपए का कर्ज दिया हुआ है। जबकि इंडसइंड बैंक की ओर से 3995 करोड़ रुपए, आईडीएफसी फस्र्ट बैंक ने 2500 करोड़ रुपए, आईसीआईसीआई बैंक ने 1725 करोड़ रुपए और पंजाब नैशनल बैंक ने 10,277.7 करोड़ रुपए दिए हुए हैं। ऐसे में बैंकों को भी बड़ा नुकसान होगा।

15 से 20 हजार लोगों की जा सकती हैं नौकरियां
वहीं दूसरी ओर कंपनी के बंद होने की स्थिति में कई हजार लोगों की नौकरियां जाने का भी खतरा बढ़ जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जब वोडा आईडिया कंपनी अस्तित्व में आई थी, तब कंपनी में 17 हजार लोग काम कर रहे थे। जबकि उससे पहले दोनों अलग-अलग कंपनियों में कुल कर्मचारियों की संख्या 22 हजार के आसपास थी। अगर कंपनी पर ताला लगता है तो कर्मचारी भी जॉबलेस हो जाएंगे।

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कुमार मंगलम का भी आया था बयान
दिसंबर में कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा था कि अगर कंपनी को सरकार से राहत नही मिली तो कंपनी को बंद करना पड़ेगा। बिड़ला ने साफ संकेत दे दिया था अब बिड़ला ग्रुप वोडाफोन-आईडिया में कोई निवेश नहीं करेगा। बिड़ला ने यह भी कहा था कि अच्छे रुपए को बुरे रुपए में निवेश का कोई मतलब नहीं है। सरकारी राहत ना मिलने पर कंपनी के कदम के सवाल पर बिड़ला ने कहा था कि हम अपनी दुकान बंद कर देंगे। उन्होंने कहा था कि राहत नहीं मिलने की स्थिति में कंपनी दिवालिया प्रक्रिया का रास्ता अपनाएगी।

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वोडाफोन के सीईओ ने भी दिए थे संकेत
कुमार मंगलम बिड़ला से पहले नवंबर में वोडाफोन के सीईओ निक रीड ने भी कंपनी के भारत में भविष्य पर संदेह जताया था। उन्होंने कहा था कि असहयोगी रेग्युलेशन और बहुत ज्यादा टैक्स की वजह से वित्तीय तौर पर कंपनी पर काफी बड़ा बोझ है। भारत में कंपनी का भविष्य अधर में जाता दिख रहा है। उन्होंने भारतीय टेलीकॉम सेक्टर के बारे में कहा था हुत ज्यादा टैक्स चार्ज की वजह से भारतीय टेलिकॉम सेक्टर मुश्किलों से घिर चुका है। यही कारण है कि भारत टेलिकॉम ऑपरेटरों की स्थिति काफी नाजुक हो चुकी है।


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