Amitabh Bachchan Movie Shahenshah To Remake – पर्दे पर फिर गूंजेगा ‘रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं!’

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पुरानी हिट फिल्मों के रीमेक के दौर में ताजा चर्चा है कि ‘सदी के महानायक’ और ‘बॉलीवुड के शहंशाह’ के तौर पर मशहूर अमिताभ बच्चन की ‘शहंशाह’ को दोबारा बनाने पर विचार किया जा रहा है। टीनू आनंद के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1988 में आई थी और उस साल अनिल कपूर-माधुरी दीक्षित की ‘तेजाब’ के बाद दूसरी सबसे बड़ी हिट रही थी। अमिताभ के अलावा इसमें मीनाक्षी शेषाद्रि और अमरीश पुरी मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म का डायलॉग ‘रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह’ की गूंज आज भी कायम है। यह पहला मौका नहीं है, जब ‘शहंशाह’ को दोबारा बनाने को लेकर चर्चा हो रही है।

इससे पहले 2016 में भी इस तरह की खबरें सामने आई थीं। उस वक्त मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब बताया जा रहा है कि जल्द ही इसके रीमेक की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। अमिताभ की दो फिल्मों ‘डॉन’ (शाहरुख खान) और ‘अग्निपथ’ (ऋतिक रोशन) के रीमेक सामने आ चुके हैं। उनकी ‘सत्ते पे सत्ता’ के रीमेक की भी तैयारियां चल रही हैं।

पर्दे पर फिर गूंजेगा 'रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं!'

साथ आ सकती है पुरानी टीम
रिपोर्ट के अनुसार टीनू आनंद अपनी इस फिल्म को दोबारा बनाने पर विचार कर रहे हैं। इसमें टाइटल रोल अमिताभ ही निभा सकते हैं। मूल फिल्म को टीनू आनंद ने नरेश मल्होत्रा के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया था। रिपोर्ट के अनुसार इस बार भी दोनों मिलकर रीमेक बनाएंगे।

जया बच्चन ने लिखी थी कहानी
‘शहंशाह’ की कहानी जया बच्चन ने लिखी थी, जिसे टीनू आनंद के पिता इंदर राज आनंद ने विकसित किया था। टीनू आनंद इससे पहले अमिताभ को लेकर ‘कालिया’ (1981) बना चुके थे। ‘कालिया’ का एक डायलॉग ‘हम जहां खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है’ काफी लोकप्रिय हुआ था। ‘शहंशाह’ के बाद अमिताभ को लेकर टीनू आंनद ‘मैं आजाद हूं’ और ‘मेजर साहब’ बना चुके हैं।

पर्दे पर फिर गूंजेगा 'रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं!'

प्रदर्शन से पहले हुआ था विवाद
‘शहंशाह’ के प्रदर्शन से पहले कुछ प्रतिपक्षी पार्टियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अमिताभ बच्चन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। अमिताभ उस समय कांग्रेस सांसद थे और उनके दोस्त राजीव गांधी प्रधानमंत्री। विरोध की वजह से ‘शहंशाह’ को प्रदर्शन की तारीख (12 फरवरी, 1988) से दो दिन पहले सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट मिल पाया था।


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