Bhuvneshwar Will Be Able To Show Magic Of Their Waving Balls – नजरें भुवनेश्वर पर, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ क्या दिखा पाएंगे अपनी लहराती गेंदों का जादू?

0
49


नई दिल्ली : टीम इंडिया (Team India) के बेहतरीन स्विंग गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) माने जाते हैं। ए समय ऐसा था, जब वह क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में भारतीय एकादश के अपरिहार्य अंग थे। लेकिन अब वह टेस्ट टीम के नियमित हिस्सा नहीं रहे और अब वनडे और टी-20 में भी कई उदीयमान तेज गेंदबाजों के आ जाने के कारण सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनके लिए जगह बनाए रखने के लिए लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बनता जा रहा है। इस पर से भुवनेश्वर कुमार का दक्षिण अफ्रीका के कप्तान क्विंटन डिकॉक के खिलाफ प्रदर्शन भी बेहद खराब रहा है। डिकॉक एकदिवसीय क्रिकेट में भुवनेश्वर की 146 गेंदों का सामना कर चुके हैं और उनकी गेंद पर बिना आउट हुए 100 से भी ज्यादा की स्ट्राइक रेट से 151 रन बना चुके हैं।

चोट के बाद वापसी कर रहे हैं भुवनेश्वर

भुवनेश्वर कुमार आईसीसी एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप 2019 के बाद से ही अनफिट चल रहे थे। बताया जाता है कि वह 2019 विश्व कप में भी पूरी तरह फिट नहीं थे। उन्हें इसलिए खेलाया गया, क्योंकि वह भारतीय आक्रमण के धुरी थी। विश्व कप से लौटने के बाद वह फिटनेस प्राप्त करने के लिए बेंगलूरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) में पुनर्वास के लिए चले गए थे। वहां से करीब छह महीने बाद फिट होकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया में वापसी की, लेकिन एक ही मैच खेलकर दोबारा अनफिट हो गए। मुंबई के डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें स्पोर्ट्स हर्निया है और उनको ऑपरेशन कराना होगा। इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपने खर्चे पर उन्हें इसी साल जनवरी में ऑपरेशन के लिए लंदन भेजा था। सफल ऑपरेशन के बाद से वह एनसीए में पुनर्वास पर थे। अब फिट होकर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलने के लिए टीम इंडिया में लौटे हैं।

 

bhuvneshwar_kumar7.jpg

भुवनेश्वर पर इस वजह से है दबाव

भुवनेश्वर कुमार पर प्रदर्शन का दबाव इस कारण भी है, क्योंकि किसी भी खिलाड़ी के लिए चोट के बाद वापसी करना आसान नहीं होता और भुवनेश्वर तो काफी लंबे समय से क्रिकेट से दूर हैं। इस कारण उन्हें लय में आने में थोड़ा समय लग सकता है। इसे हालिया उदाहरण से भी समझ सकते हैं। स्ट्रेस फैक्चर से उबर कर वापसी करने वाले टीम इंडिया के शीर्ष गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज समेत पूरे कीवी दौरे पर अपना पुराना जादू नहीं दिखा पाए थे। माना जा रहा है कि इसी तरह की समस्या से भुवनेश्वर कुमार को भी जूझना पड़ सकता है।

इसी साल अक्टूबर-नवंबर में होना है टी-20 विश्व कप

बता दें कि इसी साल अक्टूबर-नवंबर में टी-20 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होना है। माना जा रहा है कि इस विश्व कप में अगर भारत को बेहतर करना है तो ऑस्ट्रेलिया में तेज गेंदबाजी के लिए अनुकूल परस्थितियां होने के कारण भारतीय तेज गेंदबाजों को बेहतर करना होगा। ऐसे में फिट भुवनेश्वर कुमार वहां के कंडीशन में भारत के लिए काफी अहम हो सकते हैं। लेकिन अगर वह दक्षिण अफ्रीका और इसके बाद दो महीने तक चलने वाले आईपीएल में लय में नहीं आते तो टी-20 विश्व कप की टीम में उन पर तलवार लटक सकती है।

 

bhuvneshwar_kumar5.jpg

विश्व कप टीम में भुवनेश्वर के होने पर इसलिए है संशय

आईसीसी वनडे विश्व कप के बाद सीमित ओवरों के फॉर्मेट में कई युवा तेज गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसमें खासकर दीपक चाहर और नवदीप सैनी का नाम उल्लेखनीय है। इनमें से चाहर को स्विंग में महारथ हासिल है तो वहीं सैनी के पास 150 किलोमीटर की रफ्तार से गेंद फेंकने का दम है। इसके अलावा कुछ समय पहले तक टी-20 क्रिकेट के लिए फिट नहीं माने जाने वाले मोहम्मद शमी ने भी इस फॉर्मेट में शानदार किया है। अब वह टी-20 के स्थायी गेंदबाज बन गए हैं। वहीं जसप्रीत बुमराह भारतीय तेज गेंदबाजी के अपरिहार्य अंग बन गए हैं। ऐसे में उनका और शमी का विश्व कप में चयन तय माना जा रहा है। बाकी बचे स्थान के लिए भुवनेश्वर की इन गेंदबाजों से टक्कर है। इसके अलावा विश्व कप के लिए और जिन गेंदबाजों पर नजर है, उसमें आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेलने वाले प्रसिद्ध कृष्णा का नाम लेकर विराट कोहली ने यह संकेत दे दिया था कि वह भी दावेदारों में शामिल हैं।

क्या है भुवनेश्वर की ताकत

भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की सबसे बड़ी ताकत उनका स्विंग है। वह बहुत आसानी से गेंद को दोनों तरफ घुमाते हैं। इसके बावजूद ऐसा नहीं है कि वह तेज गेंद नहीं करते। वह 140 तक की स्पीड भी आसानी से निकाल लेते हैं। इस बात को भुवनेश्वर भी मानते हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि उनका मजबूत पक्ष पेस नहीं है। वह विकेट हासिल करने के लिए अपनी तेजी पर नहीं, बल्कि स्विंग पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा था कि वह इसी तरह से गेंदबाजी जारी रखेंगे। दूसरों की नकल करने के चक्कर में पेस पर निर्भर नहीं होंगे।

अगर सिर्फ स्विंग की बात करें तो भुवनेश्वर के बाद राजस्थान के तेज गेंदबाज दीपक चाहर की स्विंग भी बेहतरीन हैं।

वनडे में भुवनेश्वर का ऐसा है प्रदर्शन

भुवनेश्वर कुमार सबसे बड़ी खासियत है कि वह विकेट लेने के साथ-साथ बल्लेबाजों को अपनी गेंदों पर रन नहीं बनाने देते। इस कारण उनकी गेंदबाजी का इकोनॉमी काफी अच्छा रहता है और इस कारण अगर उन्हें विकेट नहीं भी मिलता तो इसका फायदा दूसरे गेंदबाजों को मिलता है और बल्लेबाज दबाव में आकर विकेट गंवा देता है। भुवनेश्वर ने अब तक 114 एकदिवसीय मैच में कुल 132 विकेट लिए हैं। उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है 42 रन देकर 5 विकेट, जबकि उनका गेंदबाजी औसत 34.61 है और इकोनॉमी 5.03 की है।

bhuvneshwar_kumar6.jpg

टी-20 में भी शानदार इकोनॉमी है भुवनेश्वर की

टी-20 क्रिकेट में भी भुवनेश्वर कुमार की इकोनॉमी शानदार है। उन्होंने भारत की तरफ से अब तक 43 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और 26.54 की गेंदबाजी औसत से 41 विकेट लिए हैं। इस दौरान उनकी इकोनॉमी रही है 7.05 रन की। वहीं विश्व की सबसे बड़ी टी-20 लीग आईपीएल में भुवनेश्वर कुमार 117 मैचों में 23.71 की शानदार गेंदबाजी औसत से 133 विकेट ले चुके हैं। इस दौरान उनकी इकोनॉमी 7.25 रहा है।











LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here