BJP Member Varun Gandhi Questioned Lawmakers Power To Hike Their Own Salaries – इधर नहीं थम रही किसानों की आत्महत्या की घटनाएं, उधर सांसदों के वेतन में हो गई 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी

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सांसद पिछले एक दशक में अपने वेतन-भत्ते चार सौ प्रतिशत तक बढ़ा चुके हैं। जबकि ब्रिटेन की संसद के सदस्यों के वेतन-भत्ते इसी अवधि में मात्र 13 प्रतिशत बढ़ाए गए हैं।

सांसदों के वेतन-भत्तों का मामला मंगलवार को लोकसभा में उठाया। भाजपा सांसद वरूण गांधी ने कहा कि सांसद पिछले एक दशक में अपने वेतन-भत्ते चार सौ प्रतिशत तक बढ़ा चुके हैं। जबकि ब्रिटेन की संसद के सदस्यों के वेतन-भत्ते इसी अवधि में मात्र 13 प्रतिशत बढ़ाए गए हैं। 

वरूण ने सदन से अपील की कि कम से कम मौजूदा संसद की अवधि तक सांसद विशेषाधिकार छोड़ दें और सांसदों के वेतन-भत्तों के लिए संसद से बाहर एक स्वतंत्र निकाय बनाया जाए।

शून्यकाल में वरूण गांधी ने यह मामला उठाते हुए कहा कि देश में पिछले एक साल में 18 हजार किसानों ने आत्महत्या की है। हाल ही तमिलनाडु के किसानों ने राजधानी दिल्ली में आकर अपनी पीड़ा सरकार के समक्ष जाहिर करने के लिए स्वयं का मूत्र तक पी लिया। इसके बावजूद तमिलनाडु विधानसभा ने अपने विधायकों का वेतन 19 जुलाई को एक विधेयक पारित कर दोगुना कर लिया। 

वरूण ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की केबिनेट की प्रथम बैठक का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों की पीडा को देखते हुए उन्होंने छह माह तक वेतन नहीं लेने का निर्णय किया था। उडीसा विधानसभा सदस्य ने भी उस जमाने में 45 रूपए प्रतिदिन के स्थान पर मात्र 25 रूपए प्रतिदिन लिए। 

वरूण गांधी ने ब्रिटेन की संसद की तर्ज पर एक स्वतंत्र प्राधिकरण गठित करने का सुझाव दिया और कहा राजकोष से स्वयं के वित्तीय संकलन को बढ़ाने की आधिकारिता हथियाना प्रजातांत्रिक नैतिकता के अनुरूप नहीं है।

वरूण ने संसद के कामकाज पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि मात्र 50 प्रतिशत बिल संसदीय समितियों से जांच के बाद पारित किए गए हैं और 41 प्रतिशत बिल सदन में चर्चा के बिना ही पारित कर दिए गए। 

उन्होंने कहा कि 1952 में सदन की 123 बैठक होती थी जो अब 75 से भी कम हो गई हैं। जहां तक निजी क्षेत्र से सांसदों के वेतन की तुलना का प्रश्न है तो निजी क्षेत्र में काम करने वाले स्वयं के हित के लिए काम करते हैं जबकि हम देश सेवा के लिए कार्य करते हैं। 










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