Construction of first Hindu temple in Abu Dhabi after 2 years, will not use iron

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दुबई। संयुक्त अरब अमीरात ( United Arab Emirates ) के की राजधानी अबूधाबी ( Abu Dhabi ) में पहले हिन्दू मंदिर ( First hindu temple ) का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। ये कार्य आधारशिला रखने ( Lay foundation stone ) के दो साल बाद शुरू हुआ है। अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया है कि मंदिर की नींव को पहली बार कंक्रीट से भरने का कार्य पूरा कर लिया गया है।

इसकी नींव गुरुवार को डाली गई। सबसे खास बात ये है कि इस मंदिर के निर्माण में किसी तरह से लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। मंदिर समिति के मुताबिक, इसका निर्माण भारत के पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के हिसाब से बनाया जाएगा। जिसमें लोहे के बजाय फ्लाई-ऐश कंक्रीट ( Fly-ash concrete ) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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UAE में भारत के राजदूत पवन कपूर और दुबई में भारत के महावाणिज्य दूत विपुल, सामुदायिक विकास प्राधिकरण के CEO उमर अल मुथन्ना और शापूरजी पलोंजी के CEO मोहनदास सैनी की मौजूदगी में पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामी और पूज्य अक्षयमुनिदास स्वामी ने परियोजना के लिए विशेष पूजा की।

इस दौरान ब्रह्मविहारी स्वामी ने कहा कि आज हमने मंदिर की अनोखी नींव भरने का कार्य प्रारंभ किया जिसका निर्माण प्राचीन प्रौद्योगिकी के साथ आधुनिक उपकरणों से किया गया है।

2018 में पीएम मोदी ने रखी थी आधारशिला

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में दुबई के ओपेरा हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्‍तम स्वामीनारायण संस्‍था ( BAPS ) मंदिर की आधारशिला रखी थी। BAPS का यह मंदिर करीब 14 एकड़ में बनाया जा रहा है।

इस मंदिर के निर्माण कार्य के लिए भारत में 3,000 से अधिक शिल्पकार जुटे हुए हैं। करीब 5,000 टन इटैलियन कैरारा मार्बल पर नक्काशी की जा रही है। मंदिर का बाहरी हिस्सा करीब 12,250 टन गुलाबी बलुआ पत्थर से बनेगा। ऐसा माना जाता है कि इन पत्थरों में भीषण गर्मी झेलने की क्षमता होती है और 50 डिग्री में भी गर्म नहीं होता है।

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नींव में भरा गया 3,000 घन मीटर कंकरीट का मिश्रण

बता दें कि निर्माण स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। नींव डालने से पहले समारोह की शुरुआत प्रार्थनाओं के साथ हुई, जिसके बाद मंदिर की नींव में फ्लाई ऐश कंकरीट भरने का काम पूरा हुआ।

मंदिर की नींव में एक ही बार में 3,000 घन मीटर कंकरीट का मिश्रण भरा गया जो 55 प्रतिशत फ्लाई ऐश से बना हुआ था।

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