Corona Virus Effect On Bollywood Movies And Business – फिल्म इंडस्ट्री के लिए बेहद कड़ा है यह साल, आगे-आगे देखिए होता है क्या

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-दिनेश ठाकुर
करीब 50 साल पहले हसरत जयपुरी ने रमेश सिप्पी की ‘अंदाज’ के लिए जो गाना ‘जिंदगी इक सफर है सुहाना/ यहां कल क्या हो किसने जाना’ लिखा था, उसके भावों की गहराई भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों गहरी टीस पैदा कर रही है। पिछले साल तक 100 से 300 करोड़ रुपयों तक का कारोबार करने वाली फिल्मों की लम्बी लिस्ट से बल्ले-बल्ले होने वाली यह इंडस्ट्री इस साल अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। ढेरों सितारों से लैस होने के बावजूद उसके सामने अंधेरे की एक लम्बी सुरंग है, जहां उजाले के लिए फिलहाल जुगनू भी नजर नहीं आ रहे हैं।

किसने सोचा था कि 2019 में सौ करोड़ क्लब वाली 17 फिल्मों के बाद 2020 के शुरुआती चार महीनों में यह क्लब सूना पड़ा रहेगा। इस साल अब तक आईं करीब 40 फिल्मों में से सिर्फ अजय देवगन की ‘तानाजी’ ने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार किया। ‘बागी 3’ से उम्मीदें थीं, लेकिन लॉकडाउन ने इसका मीटर डाउन कर दिया। लॉकडाउन 3 मई तक बढऩे के बाद यह भी काफी कुछ तय हो गया है कि मई तक किसी फिल्म पर झमाझम धन-वर्षा के आसार नहीं हैं। गर्मी से झुलसती जमीन पर बारिश की पहली बूंदों को फना होना ही पड़ता है।

तीन मई के बाद अगर सिनेमाघर खुलते भी हैं तो कोई फिल्मकार अपनी नई फिल्म को इस तरह फना नहीं करना चाहेगा। चीन के मामले से वे वाकिफ हैं। वहां करीब ढाई महीने बाद 500 सिनेमाघर पिछले महीने खोले गए थे, लेकिन सभी दर्शकों को तरस गए। तीन दिन बाद उन्हें फिर बंद करना पड़ा। कोरोना काल ने लोगों को एहतियात बरतना सिखा दिया है। अक्षय कुमार की ‘सूर्यवंशी’ और ‘लक्ष्मी बम’, रणवीर सिंह की ’83’, सलमान खान की ‘राधे : योर मोस्ट वांटेड भाई’, कियारा आडवाणी की ‘इंदू की जवानी’, जाह्नवी कपूर की ‘रूही अफजाना’, राजकुमार राव की ‘छलांग’ तथा अनन्या पांडे की ‘खाली पीली’ प्रदर्शन की कतार में हैं, लेकिन इनमें से किसी का निर्माता नहीं चाहता कि सिनेमाघर खुलने के फौरन बाद उसकी फिल्म रिलीज हो। बॉलीवुड के ट्रेड पंडितों का मानना है कि मई-जून तक सिनेमाघरों में भीड़ उमडऩा फिलहाल सपना ही लगता है। अप्रेल से जून तक की मियाद को फिल्मी कारोबार के लिहाज से सबसे बेहतर सीजन माना जाता है। पिछले चार-पांच साल के आंकड़ों के मुताबिक इन तीन महीनों में फिल्मों का नेट कलेक्शन 850-900 करोड़ रुपए रहता है। ट्रेड पंडितों का अनुमान है कि इस साल बॉलीवुड को इस कारोबार से वंचित रहना पड़ सकता है।

इस साल अब तक की फ्लॉप फिल्मों और 15 मार्च से सिनेमा के ठप पड़े कारोबार से बॉलीवुड को करीब एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। जून तक यह आकड़ा 1800 करोड़ रुपए के पार जाता लग रहा है। ’83’ के निर्देशक कबीर खान यह मानकर चल रहे हैं कि हालात सामान्य होने में चार महीने लग सकते हैं तो ट्रेड पंडितों को लगता है कि तीन-चार महीने बाद फिल्मों के धड़ाधड़ सिनेमाघरों में उतरने से भी इंडस्ट्री को नुकसान हो सकता है, क्योंकि इससे कुछ फिल्में पेंचबाजी का शिकार होंगी। कोरोना ने इस साल के फिल्मी कलैंडर को इस कदर उलट-पुलट कर दिया है कि कई फिल्मों का प्रदर्शन अगले साल तक खिसकाया जा सकता है, क्योंकि लॉकडाउन से इनकी शूटिंग ठप पड़ी है।


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