Covid-19: Who Chief Tedros Adhanom Ghebreyesus Says World Listened Organization, Situation Would Not So Frightening – डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा, दुनिया ने संगठन की बात सुनी होती तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती

0
169


टेड्रोस अधनोम ग्रेबेसियस (फाइल फोटो)
– फोटो : Facebook

ख़बर सुनें

पूरी दुनिया कोरोना वायरस का दंश झेल रही है। चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस से दुनिया में अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही 30 लाख लोग इस वायरस की चपेट में हैं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम ग्रेबेसियस ने कोरोना से निपटने को लेकर संगठन का बचाव किया है। 

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि दुनिया के तमाम देशों को संगठन की बात सुननी चाहिए थी जब उसने इस वायरस को लेकर 30 जनवरी को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ घोषित किया था। 

उन्होंने कहा कि उस दौरान चीन के बाहर केवल 82 मामले सामने आए थे और किसी की भी मौत नहीं हुई थी। उस दौरान पूरी दुनिया को डब्लूएचओ की बात को ध्यान से सुनना चाहिए था। 

डब्लूएचओ प्रमुख ने कहा कि हमने सभी देशों को व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण लागू करने की सलाह दी और हमने कहा कि वे ‘ढूंढ़ों’, ‘टेस्ट करो’, ‘पृथक करो’ और ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ के नियम का पालन करें।

उन्होंने कहा कि आप स्वयं ही इस बात की जांच कर सकते हैं कि जिन देशों ने इस नियम का पालन किया है वे दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। डब्लूएचओ प्रमुख ने कहा कि अगर संगठन की बात सुनी गई होती तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती।
 
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डब्लूएचओ पर गंभीर रूप से गलत संचालन और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए, अमेरिका द्वारा दिए जा रहे दान पर रोक लगाने का आदेश दिया। 

ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ की फंडिंग को रोक रहा है। ट्रंप ने संगठन पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि कोरोना वायरस के प्रसार का कुप्रबंधन करने और उसकी जानकारी छिपाने में संगठन की भूमिका का आकलन किया जाएगा। 

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों के साथ वार्ता करते हुए कहा था कि आज मैं अपने प्रशासन को डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने का आदेश दे रहा हूं। इसके साथ ही कोरोना वायरस के प्रसार को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। हर कोई जानता है कि वहां क्या हुआ है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोना महामारी को लेकर पारदर्शिता नहीं रखी और संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को सबसे ज्यादा फंड देने वाला अमेरिका अब इसपर विचार करेगा कि संगठन को दिए जाने वाले पैसे का क्या किया जाए।  

पूरी दुनिया कोरोना वायरस का दंश झेल रही है। चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस से दुनिया में अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही 30 लाख लोग इस वायरस की चपेट में हैं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम ग्रेबेसियस ने कोरोना से निपटने को लेकर संगठन का बचाव किया है। 

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि दुनिया के तमाम देशों को संगठन की बात सुननी चाहिए थी जब उसने इस वायरस को लेकर 30 जनवरी को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ घोषित किया था। 

उन्होंने कहा कि उस दौरान चीन के बाहर केवल 82 मामले सामने आए थे और किसी की भी मौत नहीं हुई थी। उस दौरान पूरी दुनिया को डब्लूएचओ की बात को ध्यान से सुनना चाहिए था। 

डब्लूएचओ प्रमुख ने कहा कि हमने सभी देशों को व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण लागू करने की सलाह दी और हमने कहा कि वे ‘ढूंढ़ों’, ‘टेस्ट करो’, ‘पृथक करो’ और ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ के नियम का पालन करें।

उन्होंने कहा कि आप स्वयं ही इस बात की जांच कर सकते हैं कि जिन देशों ने इस नियम का पालन किया है वे दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। डब्लूएचओ प्रमुख ने कहा कि अगर संगठन की बात सुनी गई होती तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती।
 
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डब्लूएचओ पर गंभीर रूप से गलत संचालन और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए, अमेरिका द्वारा दिए जा रहे दान पर रोक लगाने का आदेश दिया। 

ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ की फंडिंग को रोक रहा है। ट्रंप ने संगठन पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि कोरोना वायरस के प्रसार का कुप्रबंधन करने और उसकी जानकारी छिपाने में संगठन की भूमिका का आकलन किया जाएगा। 

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों के साथ वार्ता करते हुए कहा था कि आज मैं अपने प्रशासन को डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने का आदेश दे रहा हूं। इसके साथ ही कोरोना वायरस के प्रसार को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। हर कोई जानता है कि वहां क्या हुआ है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोना महामारी को लेकर पारदर्शिता नहीं रखी और संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को सबसे ज्यादा फंड देने वाला अमेरिका अब इसपर विचार करेगा कि संगठन को दिए जाने वाले पैसे का क्या किया जाए।  

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here