Cricketer Will Take Three Weeks To Match Fit After Lockdown – घर में खुद को फिट रखना मुश्किल, लॉकडाउन के बाद मैच फिट होने में खिलाड़ियों को लगेंगे तीन सप्ताह

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फिजिकल ट्रेनरों का मानना है कि यह धारणा गलत है कि Team India के खिलाड़ियों को लॉकडाउन में मिले आराम से तरोताजा होने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली : आमतौर पर धारणा यह है कि टीम इंडिया (Team India) के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बहुत ज्यादा क्रिकेट खेलते हैं, इसलिए लॉकडाउन में मिले आराम से भारतीय क्रिकेटरों के प्रदर्शन में सुधार आएगा और वह लॉकडाउन के बाद जब क्रिकेट शुरू होगा तो टीम इंडिया के खिलाड़ी तरोताजा होकर उतरेंगे, लेकिन फिटनेस विशेषज्ञ और क्रिकेट के जानकार ऐसा नहीं मानते। उनका मानना है कि यह आराम सामान्य नहीं है। अगर लॉकडाउन नहीं होता और क्रिकेटर ने ब्रेक लिया होता तो वह फ्रेश हो सकता है, लेकिन इस समय घर में होने के कारण उनका आउटडोर एक्सरसाइज बंद है। इस कारण उन्हें लॉकडाउन के बाद खेलने लायक फिटनेस हासिल करने में कम से कम तीन हफ्ते लग जाएंगे।

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आउटडोर ट्रेनिंग का विकल्प इंडोर नहीं हो सकता

टीम इंडिया के पूर्व ट्रेनर रामजी श्रीनिवास समेत कई फिजिकल ट्रेनरों का मानना है कि यह सही है कि बहुत सारे क्रिकेटर अपने घर में ट्रेडमिल पर मांशपेशियों की कसरत कर रहे हैं, लेकिन इंडोर एक्सरसाइज कभी आउटडोर एक्सरसाइज की जगह नहीं ले सकता। ट्रेडमिल पर दौड़ना बाहर मैदान पर दौड़ने की बराबरी कभी नहीं कर सकता। प्रशिक्षण के दौरान मैदान पर खिलाड़ियों की ओर से जताई जाने वाली प्रतिक्रिया काफी अहम होती है। रामजी 2011 विश्व कप में टीम इंडिया के फिजिकल ट्रेनर थे।

सुदर्शन बोले, तेज गेंदबाजों को ज्यादा होगी परेशानी

2013 से 2016 तक टीम इंडिया के फिजिकल ट्रेनर रहे सुदर्शन ने कहा कि लंबे समय बाद घर से निकल कर मैदान पर उतरने वाले तेज गेंदबाजों को सबसे ज्यादा मुश्किल होगी। उन्होंने कहा कि तेज गेंदबाजी पूरी तरह मांशपेशियों की गतिविधि पर निर्भर करता है। इसमें उनका रनअप और जम्प आता है। इसमें उन पर काफी जोर पड़ता है। एकाएक इस पर जोर देने से ये चोटिल हो सकते हैं। इसलिए धीरे-धीरे करके देना होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कम से कम 21 दिन तो लगेंगे ही।

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बालाजी बोले, आराम से नहीं मिलेगी मदद

टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज और चेन्नई सुपर किंग्स के मौजूदा गेंदबाजी कोच लक्ष्मीपति बालाजी ने कहा कि यह धारणा कि आराम से खिलाड़ियों को मदद मिलेगी, गलत है। यह कुछ वैसा ही है, जैसे लगातार चल रही कार ण्कदम से सो जाए। इसके बाद बैट्री गर्म होने में काफी समय लेती है। ऐसा ही क्रिकेटरों की बॉडी के साथ है, खासकर उनके साथ जो लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं। तेज गेंदबाजों को लेकर उन्होंने भी चिंता जताई। साथ में कहा कि खासकर बुमराह, जिनका इतिहास चोटों का है। वापसी के बाद उन पर बहुत सावधानीपूर्वक नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि एक तेज गेंदबाज को न्यूनतम मैदान का छह-सात चक्कर लगाना चाहिए। इसकी बराबरी न तो ट्रेडमिल पर चक्कर लगाना या फिर जगह कठोर सतह पर दौड़ना कर सकता है। बालाजी ने कहा कि तेज गेंदबाजों के लिए इंडोर प्रैक्टिस के जरिये खुद को पूरी तरह फिट रखना बेहद मुश्किल है।


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