Crude Oil Price Affected By Corona Virus, Reached 13 Month Low – Corona Virus के कहर से सहमा Crude Oil, 13 महीनों के निचले स्तर पर पहुंचा

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  • ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम ( Brent Crude Oil Price ) 55 डॉलर से नीच आया
  • डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल ( WTI Crude Oil Price ) 50 डॉलर के आसपास
  • भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में होगी कटौती

नई दिल्ली। चीन में कोरोना वायरस के कहर ( China Coronavirus Outbreak ) से इंटरनेशनल क्रूड ऑयल पूरी तरह से सहम गया है। जहां ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 55 डॉलर से नीचे आ गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई 50 डॉलर के आसपास बना हुआ है। आखिरी बार क्रूड ऑयल के दाम का यह स्तर वर्ष 2018 के आखिरी हफ्ते का था। बीते एक महीने में क्रूड ऑयल के दाम में 10 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की कटौती देखने को मिल चुकी है। जानकारों की मानें तो चीन में कच्चे तेल की डिमांड में कमी आने की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत में कटौती देखने को मिल रही है। जानकारों के अनुसार कोरोना वायरस का कहर अगर इसी तरह से जारी रहा तो आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल के दाम में और भी कटौती देखने को मिल सकती है।

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क्रूड ऑयल 13 महीनों के निचले स्तर पर
अंतर्राष्टरीय बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर हालांकि कच्चे तेल के दाम में बीते चार दिनों की गिरावट के बाद रिकवरी आई है, लेकिन ब्रेंट क्रूड का दाम 55 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जबकि अमरीकी क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 50 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है। आईसीई पर मंगलवार को ब्रेंट क्रूड के अप्रैल अनुबंध में पिछले सत्र के मुकाबले 0.59 फीसदी की तेजी के साथ 54.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले भाव 53.95 डॉलर तक टूटा जोकि तीन दिसंबर 2018 के बाद का सबसे निचला स्तर है जब ब्रेंट का भाव 53.93 डॉलर प्रति बैरल तक टूटा था। डब्ल्यूटीआई के मार्च अनुबंध में पिछले सत्र के मुकाबले 0.74 फीसदी की तेजी के साथ 50.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले भाव 49.66 डॉलर प्रति बैरल तक टूटा था।

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चीन लगातार कम होती जा रही है क्रूड की डिमांड
चीन ने अब तक कोरोना वायरस ( China Coronavirus ) से 361 मौतों की सूचना दी है जो वर्ष 2002 और 2003 में आए सार्स से 349 मौतों की तुलना में ज्यादा है। चीन में पुष्टि किए गए कोरोनावायरस मामलों की संख्या 17,205 तक पहुंच गई है जो सार्स से दोगुना है। वहीं कच्चे तेल की कीमत में गिरावट सिर्फ बाजार की दहशत नहीं है, इसका कारण मांग का लडख़ड़ाना भी है। मांग कम होने के कारण चीन सऊदी अरब से अपने मार्च अनुबंध में कटौती कर रहा है और सिनोपेक पहले ही इस महीने अपने रिफाइनरी उत्पादन में 600,000 बीपीडी की कटौती कर रहा है। चीन के भीतर यात्रा और बाहर जाने पर कड़े प्रतिबंधों की वजह से चीन के तेल की मांग में इस साल सामान्य मांग की तुलना में 20 गिरावट फीसदी की गिरावट होगी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, यह 20 फीसदी प्रति दिन लगभग 3 मिलियन बैरल होने के आसार हैं।

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भारत पर पड़ेगा इस तरह से असर
वहीं दूसरी ओर क्रूड ऑयल की कीमत में कटौती का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में देखने को मिलेगा। मौजूदा समय में पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगातार कटौती देखने को मिल रही है। इसमें और भी कटौती होने के आसार हैं। 11 जनवरी के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा कटौती देखने को मिल चुकी है। एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी एंड रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता का कहना है चीन दुनिया में सबसे ज्यादा क्रूड आयात करने वाला देश है। कोरोना वायरस की वजह से डिमांड में काफी देखने को मिली है। अभी कोरोना वायरस के हल्के होने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। जिसकी वजह से अभी कुछ और दिन डिमांड में कमी रहने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। जिसकी वजह से क्रूड ऑयल की कीमत में और भी कटौती देखने को मिल सकती है। जिसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमत में देखने को मिल सकता है।







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