Delegation of 25 foreign ambassadors to visit kashmir Valley this week before EU-India summit

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर ( Jammu-Kashmir ) से अनुच्छेद 370 ( Article 370 ) खत्म होने के बाद से लगातार वहां के मानवाधिकार ( Humanrights ) हनन का मुद्दा उठाया जा रहा है और इसको लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने की कई कोशिशें भी हो रही है। इन सबके बीच भारत सरकार एक बार फिर से विदेशी प्रतिनिधिमंडल को कश्मीर का दौरा कराने की तैयारी कर रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र की मोदी सरकार ( Modi Government ) 25 विदेशी राजदूतों के प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर का दौरा ( foreign envoys to visit kashmir ) कराने की तैयारी में है। इसमें जर्मनी, कतर और अफगानिस्तान के राजदूत भी शामिल रहेंगे। इस दौरे के जरिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को घाटी की जमीनी स्थिति से अवगत कराया जाएगा।

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बताया जा रहा है कि ये दौरा दो दिन का होगा जो कि इसे हफ्ते हो सकता है। इस दौरे में आने वाले प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न देशों के भारत स्थित मिशनों के प्रमुख हिस्सा ले सकते हैं। सबसे बड़ी बात कि इस बार इस दौरे में यूरोपीय देशों ( European Country ) के राजदूत भी शामिल होंगे। इतना ही नहीं, यूरोपीय संघ ( European Union ) के भारत स्थित राजदूत उगो अस्तुतो भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हो सकते हैं।

बता दें कि ये घटनाक्रम ब्रुसेल्स ( Brussels ) में अगले महीने होने वाले यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन ( European Union-India Summit ) से पहले होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे।

बीते साल एक प्रतिनिधिमंडल ने किया था घाटी का दौरा

आपको बता दें कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार हनन को लेकर उठते सवालों के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब न हो इसको सबके सामने लाने को लेकर एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल को घाटी का दौरा कराया गया था। ईयू के कई सांसदों ने घाटी का दौरा किया था। हालांकि यह दौरा आधिकारिक तौर पर भारत सरकार ने नहीं कराया था।

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पिछली बार अमरीकी राजदूत समेत 15 राजदूतों ने जम्मू और कश्मीर का दौरा किया था। हालांकि तब यूरोपीय संघ ने खुद को इससे अलग रखा था। इस बार ईयू के राजदूतों का हिस्सा लेना कई मायनों में खास है, क्योंकि CAA के साथ कश्मीर की स्थिति को लेकर ईयू संसद में हाल ही में एक प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि इस प्रस्ताव को ज्यादा तव्वजो नहीं दी गई और 31 मार्च तक इस पर वोटिंग के लिए स्थगित कर दिया गया।

मासूम हो कि ईयू भारत का अहम कारोबारी पार्टनर है। ईयू भारत का सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर है। जबकि भारत की बात करें तो EU का 9वां सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर हैं।

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