Despite Slowdown Film Industry Turnover Become Rs 5600 Cr In 2019 – आर्थिक मंदी के दौर में 5600 करोड़ रुपए की हो गई ‘सपनों की दुनिया’

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नई दिल्ली। मौजूदा समय में उद्योग जगत को कुछ बेचना काफी मुश्किल हो गया है। औद्योगिक उत्पादन दर में लगातार गिरावट भी देखने को मिल रही है। वहीं महंगाई अपने चरम सीमा पर पहुंच गई है। अमरीकी रेटिंग एजेंसी मूडीज ने साफ कर दिया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश कर दिए हैं। उस रिपोर्ट का जो निष्कर्ष निकलता है कि देश में महंगाई और आर्थिक मंदी दौरान भी सपने बेचना कितना आसान और फायदे का सौदा है। जी हां, केयर रेटिंग्स की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार फिल्म इंडस्ट्री के बॉक्स ऑफिस ने 2019 में 27 फीसदी की वृद्घि की है। जबकि 2015 से साल दर साल के हिसाब से बॉक्स ऑफिस की कमाई में 13.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था के नजरिये इसे देखने को प्रयास करते हैं।

इंडियन इकोनॉमी में लिपिस्टिक इफेक्ट
केयर रेटिंग्स ने जिस तरह से आंकड़ों को पेश किया है, साथ ही इकोनॉमिक स्लोडाउन के बीच बॉक्स ऑफिस की कमाई में बढ़ोतरी को दर्शाया है, उसे ‘लिपिस्टिक इफेक्ट’ का नाम दिया गया है। एजेंसी के अनुसार जिसमें महंगे श्रृंगार के अभाव को सस्ती होठ-लाली से ढंका जाता है। उपभोक्ता विलासिता की भव्य वस्तुओं पर अपना पैसा फूंकने के बजाय आर्थिक मंदी में छोटे-मोटे कामों पर खर्च करना पसंद करते हैं। इसी को लिपिस्टिक इफेक्ट कहा जाता है। आसान भाषा में समझने का प्रयास करें तो जब आर्थिक संकट के दौर में लोग महंगे शौक के मुकाबले सस्ते विकल्पों में सुख तलाश करते हैं। यही वजह है कि 2019 में बॉलिवुड को काफी फायदा हुआ। आर्थिक मंदी के दौर में लोगों ने महंगे डेस्टीनेशन हॉलिडे, ज्वेलरी या फिर किसी लग्जरी आइटम्स पर खर्च करने की जगह फिल्में देखकर शांति और सुख तलाशने की कोशिश की।

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जीडीपी घटी, बॉलीवुड की कमाई बढ़ी
रील और रियल में क्या फर्क होता है, इन आंकड़ों में समझने का प्रयास करते हैं। पहले बात रियल की तो देश की जीडीपी चालू वित्त वर्ष में 5 फीसदी ही रह सकती है। मौजूदा समय में देश में खुदरा महंगाई दर 7.50 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है। वहीं खुदरा महंगाई दर 3 फीसदी से आगे बढ़ चुकी है। औद्योगिक उत्पादन में गिरावट लगातार जारी है। अब बात रील की हो जाए, जिसे बॉलीवुड कहा जाता है, एक सपनों की दुनिया। जहां कलाकर एक सपना बुनते हैं और सिनेमाघरों में उसे देश के लोगों को बेचा है। 2019 में बस यही एक इंडस्ट्री रही जिसने खूब सपने बनाए और बेचे भी। जिन्हें देश के लोगों ने हाथों हाथ लिया था। आंकड़ों की मानें तो बॉक्स ऑफिस कलेक्शन वर्ष 2019 में 27 फीसदी बढ़कर 5,613 करोड़ रुपए हो गया,जो पिछले पांच सालों में साल दर साल इसमें 13.4 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है।

फिल्मों की कमाई तो बढ़ी, लेकिन लोगों की खर्च सीमा कम हुई
बीते पांच सालों में देश की जीडीपी में लगातार गिरावट देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार 2015-16 में देश की जीडीपी 7.6 फीसदी थी, जो पांच सालों में सबसे ज्यादा थी। मौजूदा समय यह सिमटकर 5 फीसदी की अनुमानित दर पर आ गई है। वहीं देश के आम लोगों की मंदी और महंगाई के दौर में खर्च क्षमता में भी गिरावट आई है। वहीं दूसरी ओर फिल्मों की कमाई में इजाफा देखने को मिला है। केयर रेटिंग्स के अनुसार एक फिल्म की औसत कमाई 15 फीसदी बढ़कर 23 करोड़ रुपये हो गई। वहीं शीर्ष 10 फिल्मों की कमाई ने कुल राजस्व का 42 फीसदी हिस्सा हासिल किया। रिपोर्ट के अनुसार बेहतर सामग्री और सिनेमा टिकटों पर वस्तु एवं सेवा कर में गिरावट ने भी बॉलीवुड की मदद की है।

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रिपोर्ट की खास बातें
– ‘एवेंजर्स: एंडगेम्स’ ने वर्ष 2019 में अकेले 373 करोड़ रुपए की कमाई की।
– 2018 की सात फिल्मों के मुकाबले वर्ष 2019 में 13 फिल्मों ने 100 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार किया।
– बॉलिवुड की छह फिल्मों ने 2019 में 200 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार किया।
– चीन, मध्य पूर्व, ताइवान, मलेशिया, हांगकांग और यूके जैसे देशों में लोकप्रियता बढ़ी।
– जीएसटी दरों में गिरावट आने से औसत टिकट की कीमत दिसंबर तक के नौ महीने में घट गई है।
– महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों में कर 50 फीसदी के स्तर से नीचे आ गया है।











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