diabetes drug approved by DGCI Zydus Cadila medicine work in treatment of type 2 diabetes

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दवा कंपनी जायडस कैडिला की मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सैरोगलाइटेजर मैग्नेशियम दवा को भारतीय औषिधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) से मंजूरी मिल गई है। शेयर बाजार को दी जानकारी में कंपनी ने बताया, ” जायडस कैडिला की सैरोगलाइटेजर मैग्नेशियम को टाइप-2 मधुमेह के इलाज में उपयोग के लिए डीजीसीआई से अनुमति मिल गई है। इस दवा का उपयोग मेटफॉरमिन के साथ अतिरिक्त इलाज के रूप में किया जा सकेगा।

टाइप-2 मधुमेह में शरीर की रक्त कोशिका ऊर्जा के लिए रक्त में मौजूद शर्करा का कुशलता से उपयोग नहीं कर पाती हैं। इससे पहले इस दवा को भारत में 2013 में हाइपरट्राइग्लिसराइडेमिया और मधुमेह के इलाज में उपयोग के लिए मंजूरी दी गई थी। सैरोगलाइटेजर (पिपाग्लिन) से 10 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया गया था।

टाइप-2 डायबिटीज के कंट्रोल में सबसे जरूरी क्या है

टाइप-2 डायबिटीज या ऐसी किसी भी बीमारी की जड़ में होता है व्यक्ति का ख़राब लाइफस्टाइल। खानपान की गलत आदतें, मोटापा, व्यायाम की कमी, धूम्रपान और तनाव जैसी बुरी आदतें इसका प्रमुख कारण हैं। डॉक्टर अनुराग शाही बताते हैं, ‘शुगर को कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी है वजन पर नियंत्रण और सही समय पर सही आहार। ब्लड शुगर के लेवल पर नजर बनाए रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर दवाएं लेते रहें।‘

जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की 9 अक्टूबर 2019 को जारी रिपोर्ट में लिखा गया है, ‘अत्यधिक वजन से डायबिडीज का जोखिम बढ़ जाता है। वहीं 10 फीसदी वजन भी कम कर लिया जाए तो इस बीमारी के लक्षणों से मुक्ति पाई जा सकती है।’ इसी तरह, जर्नल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया ने डायबिटीज के मरीजों के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार, यदि उपवास रखते समय डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल 70 एमजी/डीएल के कम हो जाता है तो उन्हें उपवास तोड़ देना चाहिए।  

टाइप-2 डायबिटीज मरीजों को क्या करना चाहिए

मौजूदा दौर में लोगों की लाइफस्टाइल देखते हुए डॉक्टर सलाह देते हैं कि स्वस्थ्य लोगों को दो से तीन माह में डायबिटीज की जांच करवानी चाहिए। जिन लोगों का वजन बढ़ा हुआ है, उन्हें हफ्ते में एक बार जांच करवानी चाहिए। वहीं डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे दिन में 3 से 4 बार इसका स्तर जांचें। डायबिटीज मरीजों को नियमित रूप से इन्सुलिन लेनी होती है।

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डायबिटीज को कंट्रोल करने की कई दवाएं भी हैं, जिन्हें टेस्ट और डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए। डॉक्टर्स द्वारा सामान्य रूप से दी जाने वाली दवाओं के नाम हैं – मेटमोर्फिन, सुल्फनीरूलियस, मेगलिटिनॉइड्स, जीएसपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्टर। टाइप-2 डायबिटीज मरीजों को मेटमोर्फिन दवा सबसे पहले दी जाती है। यह शरीर में इन्सुलिन का इस्तेमाल बढ़ा देती है और लिवर कम ग्लूकोज बनाने लगता है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी भी एक इलाज है। यह सर्जरी उन मरीजों पर होती है, जिनका बॉडी मास इंडेक्स 35 से ज्यादा है। यह एक तरह से पेट की बायपास सर्जरी है।

टाइप-2 डायबिटीज कम करने में मददगार घरेलू चीजें 

इसके अलावा खानपान में खास चीजों को शामिल कर इससे बचा जा सकता है। ब्लड में शुगर लेवल को कंट्रोल करने में करेला, मेथी, एलोवेरा, नीबू, ग्रीन टी, लहसुन और पालक का सेवन लाभकारी होता है। इसके साथ ही डायबिटिक पेशेंट्स को चीनी, तली-भुनी चीजें, डेयरी उत्पाद, चाय-कॉफी, तंबाकू, शराब, अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थ जैसे आलू, गाजर, चावल, केला और ब्रेड से परहेज करना चाहिए। डॉ. अनुराग शाही के शब्दों में, ‘डायबिटीज से इसलिए भी दूर रहना जरूरी है, क्योंकि यह आपकी सेहत पर ही नहीं, जेब पर भी भारी असर डालती है।’ इसलिए स्वस्थ्य जीवनशैली अपनाएं और इस महामारी से बचकर रहें।  


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