Earth Day 2020 the countrys resources can bear burden of 30 crores not 130 crores

0
55


पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को कहा कि लॉकडाउन के दौरान प्रकृति की जो निखरी छटा सामने आयी है उसे लेकर रोमांटिक होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इन परिस्थितियों में देश के संसाधन मात्र 30 करोड़ लोगों का बोझ उठा सकते हैं, 130 करोड़ लोगों का नहीं। 

 

 

जलवायु परिवर्तन की दिशा में किए गए वायदे पूरे न करने और अधिकांश प्रदूषण के लिए विकसित देशों को जिम्मेदार ठहराते हुये उन्होंने कहा कि टिकाऊ विकास के लक्ष्य कोई देश अकेला हासिल नहीं कर सकता। कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ के बाद की दुनिया पूरी तरह बदली-बदली होगी और हमें इस नये ‘सामान्य’ को स्वीकार करना होगा। 
पृथ्वी दिवस के मौके पर एक ‘वेबीनार’ को संबोधित करते हुये केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब लोगों को टिकाऊ विकास का महत्व मालूम हो रहा है। धरती हरी-भरी है, आसमान दिन में नीला और रात को तारों भरा है, जालंधर से हिमालय दिख रहा है। प्रकृति अपनी पराकाष्ठा पर है लेकिन हमें इसे लेकर रोमांटिक नहीं होना चाहिए। 
उन्होंने कहा, “यदि हम चाहते हैं कि ऐसा ही बना रहे तो हमें “कुछ” चीजों को त्यागना पड़ेगा। हमें वाहनों, उद्योगों और उत्पादों को बंद करना होगा। हमें गांवों की तरफ लौटना होगा लेकिन तब हम सिर्फ 30 करोड़ लोगों का गुजर-बसर कर सकेंगे, 130 करोड़ लोगों का नहीं।”
 


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here