HEALTH TIPS: Know These Things, You Can Save Brain Stroke Patient Life – जान लें ये बातें, ब्रेन स्ट्रोक होने पर बचा सकते हैं किसी की जान

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BRAIN STROKE होने पर कुछ सावधानियों को बरत कर आप मरीज की जान बचा सकते हैं। जानकारी के अभाव में कई बार मरीज की जान चली जाती है। देश में हर 4 सेकंड में एक व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक (BRAIN STROKE ) होता है। ब्रेन स्ट्रोक के केस में 15-20% की उम्र 30 वर्ष से कम है। ब्रेन स्ट्रोक के 30% मरीजों की उम्र 40 वर्ष से कम होती है।

ब्रेन स्ट्रोक में शुरू के 3 से 4 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसे ‘गोल्डन पीरियड’ कहते हैं, रिकवरी भी जल्दी होती है। सबसे पहले जान लें कि ब्रेन स्ट्रोक (BRAIN STROKE ) दो प्रकार का होता है, पहला हैमरेजिक और दूसरा स्केमिक।
जानिए क्यों होता है ब्रेन स्ट्रोक
जब ब्रेन में कोशिकाओं तक नसों से दिमाग को ब्लड पहुंचता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन के बाधित होने से कोशिकाएं मरने लगती हैं। इससे ब्रेन हैमरेज होता है, दिमाग में ब्लीडिंग होने लगती है ऑक्सीजन न मिलने से दिमाग ठीक से काम नहीं करता है। ब्रेन हैमरेज से आंशिक विकलांगता या जान जाने का खतरा बढ़ता है।
ऐसे पहचानें ब्रेन स्ट्रोक
हाथ-पैर सुन्न होना, शरीर के एक भाग में कमजोरी आती है। खड़े होने पर चक्कर आता, शरीर का संतुलन बिगड़ता है। अचानक से तेज सिरदर्द और चेहरे में विकृति आ जाती है। लोगों की बातें समझने और बोलने में भी परेशानी होती है। कभी-कभी एक या दोनों आंखों की क्षमता घटने लगती है।
ब्रेन हैमरेज के इलाज में ये तकनीक कारगर
हैड व स्पाइन इंजरी के मरीजों का इलाज किया जाता है। पहले ग्लास्गो कोमा स्केल से इंजरी की गंभीरता मापते हैं। इस आधार पर भर्ती के लिए मरीज का वार्ड तय करते हैं। इसके बाद सीटी स्कैन से चोट की जांच, ब्लीडिंग देखते हैं। ब्रेन हैमरेज में नसों में गुब्बारा बनने से ये फट जाती हैं। इसके बाद दवाइयों और सर्जरी से इलाज किया जाता है। मरीज के दिमाग की सर्जरी में ब्लड क्लॉट को निकालते हैं। नसों में गुब्बारा तो क्लिपर, तार डालकर सर्जरी करते हैं
एक्सपर्ट : डॉ. दीपक शर्मा, न्यूरो एनेस्थिटिक एनेस्थेटिस्ट










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