Hearing On Two Cases Of Terrorist Funding Against Hafiz Saeed On 18th February – हाफिज सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग के दो मामलों पर सुनवाई 18 फरवरी को

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मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा (जेयूडी) सरगना हाफिज सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग के दो मामलों में पाकिस्तान के आतंकरोधी कोर्ट (एटीसी) अब 18 फरवरी को सुनवाई करेगा। इन मामलों में उसके खिलाफ एटीसी ने छह फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कब्जे के कुल 29 मामले दर्ज हैं।

दरअसल शनिवार को अदालत को इन दो मामलों पर फैसला सुनाना था, लेकिन उसकी सुनवाई मंगलवार 11 फरवरी को करने का फैसला किया था। एटीसी का कहना था कि फैसला सुनाने से पहले वह सभी मामलों पर सुनवाई कर लेना चाहता है।

इससे पहले कोर्ट ने मंगलवार को हाफिज सईद की वह याचिका स्वीकार कर ली, जिसमें छह मामलों की एकसाथ सुनवाई करने और फैसला सुनाने की मांग की थी। पाकिस्तान के अखबार डॉन के हवाले से कहा गया है कि डिप्टी प्रोसेक्यूटर जनरल अब्दुल रऊफ वट्टू ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ छह मामले अदालत में लंबित थे, जिनमें चार में सुबूत पेश करने की प्रक्रिया चल रही थी। उन चारों मामलों की सुनवाई इस सप्ताह के अंत तक कर ली जाएगी। 

बता दें कि शनिवार को सुनवाई के बाद अदालत के एक अधिकारी नेबताया कि एटीसी न्यायाधीश ने हाफिज सईद के आवेदन पर गौर किया जिसमें उसने अपने खिलाफ आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने के सभी मामलों को मिलाने और मुकदमा पूरा होने के बाद फैसला सुनाने की अपील की थी। अधिकारी ने बताया कि उप अभियोजक ने सईद की याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि उसके खिलाफ दो मामलों में मुकदमा पहले ही पूरा हो चुका है और अदालत कानून के तहत फैसला सुना सकती है।

हाफिज सईद के सहयोगियों हाफिज अब्दुल सलाम बिन मोहम्मद, मोहम्मद अशरफ और प्रोफेसर जफर इकबाल को भी आतंकवाद विरोधी कानून 1997 के तहत गिरफ्तार किया गया  था। इस मामले में सरकार की तरफ से मुफ्ती अब्दुर रऊफ वाटो ने अपना पक्ष रखा और गवाहियां पेश कीं। उनके मुताबिक इस दौरान 23 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। वाटो के मुताबिक हाफिज सईद आतंकवादियों के लिए चैरिटी के जरिये गैरकानूनी तरीके से फंड जमा करता रहा है।

जुलाई में सईद के साथ उसके जिन 13 सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था उनमें एक प्रमुख नाम नईब आमिर अब्दुल रहमान मक्की का भी हैं। सईद को 17 जुलाई को तब पकड़ा गया जब वह गुजरांवाला से लाहौर जा रहा था। उसके खिलाफ पंजाब के पांच शहरों में केस दर्ज किए गए और पाया गया कि वह अपने एनजीओ एल अनफाल ट्रस्ट, दावातुल ट्रस्ट, मउज बिन जबाल ट्रस्ट के जरिये फंड जमा करने का काम करता रहा है।

पाकिस्तान सरकार ने इन संगठनों पर पिछले साल अप्रैल से ही प्रतिबंध लगा रखा है। इनपर आरोप है कि इनके जरिए जमात उद दावा ने बड़ी मात्रा में संपत्ति जमा कर रखी है जिसका इस्तेमाल वह आतंकवादियों को मदद करने में करता रहा है। पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी सेल ने इनके खिलाफ दस्तावेजी सबूत इकट्ठे किए और अदालत में पेश किया। सरकार ने इन संपत्तियों को सील कर रखा है।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को फंडिंग देने वाले संगठनों पर रोक लगाने में नाकाम रहने के आरोपों के मद्देनजर ये कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में फाइनेंशियल एक्शन टास्कफोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान आतंकी फंडिंग रोकने में कारगर नहीं हुआ, तो उसे ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा (जेयूडी) सरगना हाफिज सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग के दो मामलों में पाकिस्तान के आतंकरोधी कोर्ट (एटीसी) अब 18 फरवरी को सुनवाई करेगा। इन मामलों में उसके खिलाफ एटीसी ने छह फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कब्जे के कुल 29 मामले दर्ज हैं।

दरअसल शनिवार को अदालत को इन दो मामलों पर फैसला सुनाना था, लेकिन उसकी सुनवाई मंगलवार 11 फरवरी को करने का फैसला किया था। एटीसी का कहना था कि फैसला सुनाने से पहले वह सभी मामलों पर सुनवाई कर लेना चाहता है।

इससे पहले कोर्ट ने मंगलवार को हाफिज सईद की वह याचिका स्वीकार कर ली, जिसमें छह मामलों की एकसाथ सुनवाई करने और फैसला सुनाने की मांग की थी। पाकिस्तान के अखबार डॉन के हवाले से कहा गया है कि डिप्टी प्रोसेक्यूटर जनरल अब्दुल रऊफ वट्टू ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ छह मामले अदालत में लंबित थे, जिनमें चार में सुबूत पेश करने की प्रक्रिया चल रही थी। उन चारों मामलों की सुनवाई इस सप्ताह के अंत तक कर ली जाएगी। 

बता दें कि शनिवार को सुनवाई के बाद अदालत के एक अधिकारी नेबताया कि एटीसी न्यायाधीश ने हाफिज सईद के आवेदन पर गौर किया जिसमें उसने अपने खिलाफ आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने के सभी मामलों को मिलाने और मुकदमा पूरा होने के बाद फैसला सुनाने की अपील की थी। अधिकारी ने बताया कि उप अभियोजक ने सईद की याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि उसके खिलाफ दो मामलों में मुकदमा पहले ही पूरा हो चुका है और अदालत कानून के तहत फैसला सुना सकती है।

हाफिज सईद के सहयोगियों हाफिज अब्दुल सलाम बिन मोहम्मद, मोहम्मद अशरफ और प्रोफेसर जफर इकबाल को भी आतंकवाद विरोधी कानून 1997 के तहत गिरफ्तार किया गया  था। इस मामले में सरकार की तरफ से मुफ्ती अब्दुर रऊफ वाटो ने अपना पक्ष रखा और गवाहियां पेश कीं। उनके मुताबिक इस दौरान 23 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। वाटो के मुताबिक हाफिज सईद आतंकवादियों के लिए चैरिटी के जरिये गैरकानूनी तरीके से फंड जमा करता रहा है।

जुलाई में सईद के साथ उसके जिन 13 सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था उनमें एक प्रमुख नाम नईब आमिर अब्दुल रहमान मक्की का भी हैं। सईद को 17 जुलाई को तब पकड़ा गया जब वह गुजरांवाला से लाहौर जा रहा था। उसके खिलाफ पंजाब के पांच शहरों में केस दर्ज किए गए और पाया गया कि वह अपने एनजीओ एल अनफाल ट्रस्ट, दावातुल ट्रस्ट, मउज बिन जबाल ट्रस्ट के जरिये फंड जमा करने का काम करता रहा है।

पाकिस्तान सरकार ने इन संगठनों पर पिछले साल अप्रैल से ही प्रतिबंध लगा रखा है। इनपर आरोप है कि इनके जरिए जमात उद दावा ने बड़ी मात्रा में संपत्ति जमा कर रखी है जिसका इस्तेमाल वह आतंकवादियों को मदद करने में करता रहा है। पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी सेल ने इनके खिलाफ दस्तावेजी सबूत इकट्ठे किए और अदालत में पेश किया। सरकार ने इन संपत्तियों को सील कर रखा है।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को फंडिंग देने वाले संगठनों पर रोक लगाने में नाकाम रहने के आरोपों के मद्देनजर ये कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में फाइनेंशियल एक्शन टास्कफोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान आतंकी फंडिंग रोकने में कारगर नहीं हुआ, तो उसे ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।


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