Hindi Story – चोर की दाढ़ी में तिनका

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चोर की दाढ़ी में तिनका


एक बार एक गाँव में एक जमींदार था | उपज को रखने के लिए उसके पास एक बड़ा सा गोदाम था |जिसमे गंदम, कपास , मक्का  आदि का भंडार रहता था | उसी गोदाम की एक दीवार में लोहे की संदूकड़ी थी,जिसमे वह  नकद धन राशि रखता था |कुछ नौकरो को इस धन का ज्ञान था | एक दिन एक नौकर के मन में संदूकड़ी से रुपया निकालने की इच्छा हुई लेकिन वह संदूकड़ी तोड़ना नहीं चाहता था |अत: वह जब भी गोदाम में जाता, समय निकाल कर चाबी बनाने का प्रयास करता |एक दिन वह इस कार्य में सफल हो गया | उसने 100-100 रूपये की गड्डी निकाल ली |

       दूसरे दिन जब जमींदार को रूपयो की आवश्यकता पड़ी तब उसने संदूकड़ी देखी | उसमे 10000 रूपये की गड्डी गायब देख कर वह बहुत हेरान हुआ और दुखी भी | चोरी का कोई भी चिन्ह नज़र नहीं आ रहा था |उस रात जमींदार को नींद नहीं आई | वह सिर पर हाथ रख कर सोच में पड़ गया |जब उसने सिर पर से हाथ उठाया तो देखा कि उसके हाथ में रुई लगी हुई है |बस फिर क्या था | उसे चोर पकड़ने कि योजना सूझ गई |उसने अपनी पत्नी और दोनों पुत्रो को बुला कर अपनी योजना बताई ताकि वे सब चोर को पकड़ने में उसी मदद कर सके |

       दूसरे दिन उसने अपने सभी नौकरो को एक स्थान पर इक्कठा किया |उसने उन्हे रूपये चोरी होने कि सारी बात बता दी और यह भी बता दिया कि उसने चोर को भी पकड़ लिया है | उसने कहा कि कपास कि बोरियों के पीछे जाकर जिसने संदूकड़ी से रुपया चुराया है , उसकी दाढ़ी में अब भी रुई फासी हुई है |यह सुनते ही असली चोर ने रुई को दाढ़ी से हटाने के लिए अपना हाथ दाढ़ी पर रखा |उसे ऐसा करते हुए सभी ने देख लिया | बस उसे पकड़ लिया गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया | उसने अपना अपराध सविकार किया |

शिक्षा – चोर के पर नहीं होते |

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