Holi festival of colours – रंगो की होली

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होली
भारत में होली एक धार्मिक एंव सामाजिक पर्व माना जाता है | रंगो की होली भावो की होली बन जाती है |जीवन में नया रंग भर देती है | जीवन में एक अनोखी मादकता छा जाती है |सब रंग एक रंग हो जाते है | जीवन रसमय हो जाता है |
       इतिहास की खोज करने पर होली के उत्सव का मूल स्रोत दो प्रकार का ज्ञात होता है |धार्मिक रूप से यह माना जाता है की हिरण्याक्ष की बहन होलिका थी |उसे हिरण्याक्ष ने प्रहलाद को राम नाम से हटाने के लिए प्रेरित किया और जब प्रहलाद अपने पवित्र कर्म से किसी भाँति भी नहीं हटा तो होलिका को प्रहलाद के प्राण ले लेने का आदेश भी मिला | तब होलिका जल गयी और प्रहलाद बच गया |होलिका के इस कांड की याद में ही यह उत्सव मनाया जाता है |
       दूसरा कारण राष्ट्रीय है | यह नये अन्न के संग्रह की योजना से संबंध रखता है |फाल्गुन मास में चने पकने लगते है | तभी किसानो द्वारा चने के पोधों को आग पर भुना जाता है | भुने हुए अदकच्चे दाने ही होलिका कहलाते है |इसी से होलिका उत्सव का आरंभ माना जाता है |
       द्वापर युग से पूर्व ही होली का त्योहार रंगो से खेला जाने लगा था |भगवतपुराण में श्री कृषण और गोपियो के होली खेलने का विस्तृत वर्णन मिलता है |होली के दिन सब लोग भेदभाव भूल कर रंगो में डूब जाते है |एक दूसरे के गले मिलते है | ऊंच नीच की भेद भावना को समाप्त करके सब लोग एक दूसरे को रंगो की खुशियो से भर देते है | पूरे वर्ष में यदि किसी का झगड़ा भी हुआ हो तो इस दिन वह समाप्त हो जाता है |
       भारत का यह रंगो का त्योहार सर्वत्र मनाया जाता है | विदेशो में भी इस त्योहार की धूम है | स्वतंत्र भारत के दूतावासो में होली का त्योहार प्रतिवर्ष मनाया जाता है |
       इस उत्सव से वेर भाव को भूलने और प्रेमभाव को जगाने की शिक्षा मिलती है |इसीलिए होली त्योहार हमारे राष्ट्रीय जीवन में भी बड़े महत्व का है |इस उत्सव को सदा इसी भावना से मनाना चाहिए | भारतीय संस्कृति सहनशीलता और शांति का प्रतीक है |इस त्योहार को इसी भावना के साथ मनाना चाहिए | होली से भारतीय जीवन की विधिवता में एकता का स्वरूप प्रकट होता है |

       

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