It Ministry Proposal Social Media Companies Have To Create Database Of Active Numbers – आईटी मंत्रालय का प्रस्ताव, सोशल मीडिया कंपनियों को एक्टिव मोबाइल नंबर के लिए बनाना होगा डाटाबेस

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सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने प्रस्ताव जारी किया है, जिसमें दिग्गज सोशल मीडिया कंपनियों को सबसे ज्यादा एक्टिव रहने वाले मोबाइल नंबर्स का एक अलग से डाटाबेस तैयार होगा। बता दें कि सोशल मीडिया कंपनियों को सत्यापन कारणों को लेकर यह डाटाबेस बनाना पड़ेगा। सूत्रों की मानें तो यह प्रस्ताव तेजी से फैलते सोशल मीडिया के क्षेत्र में यूजर्स को लेकर जानकारी नहीं होने के जैसे मुद्दों को निपटाने में मदद करेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए मौजूदा नियमों में संशोधन के हिस्से के तौर पर पहली बार इस प्रस्ताव को पेश किया गया है।

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जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को नए नियमों का पालन करना पड़ेगा। वहीं, दूसरी तरफ सूत्रों का कहना हैं कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां, मध्यवर्ती संस्थान और मंचों को उनके दायित्व और जरूरत के बीच फर्क पर जोर देना होगा। साथ ही इन कंपनियों को लागू होने वाले नियमों के तहत जरूरत और उनके दायित्वों का स्पष्ट रूप से उल्लेख करना पड़ेगा।  

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ जारी प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रमुख सोशल मीडिया मध्यवर्ती इकाइयों को उनके उपयोगकर्ताओं में एक्टिव रहने वाले मोबाइल नंबर्स की पुष्टि करनी होगी और उनका अलग से डाटा बनाना होगा। बता दें कि  इन प्रस्तावित संशोधनों को लेकर नियमों का मसौदा दिसंबर, 2018 में पेश किया गया था। वहीं, आईटी मंत्रालय में इस मुद्दे को लेकर कई बैठके भी हो चुकी हैं। 

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने प्रस्ताव जारी किया है, जिसमें दिग्गज सोशल मीडिया कंपनियों को सबसे ज्यादा एक्टिव रहने वाले मोबाइल नंबर्स का एक अलग से डाटाबेस तैयार होगा। बता दें कि सोशल मीडिया कंपनियों को सत्यापन कारणों को लेकर यह डाटाबेस बनाना पड़ेगा। सूत्रों की मानें तो यह प्रस्ताव तेजी से फैलते सोशल मीडिया के क्षेत्र में यूजर्स को लेकर जानकारी नहीं होने के जैसे मुद्दों को निपटाने में मदद करेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए मौजूदा नियमों में संशोधन के हिस्से के तौर पर पहली बार इस प्रस्ताव को पेश किया गया है।

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जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को नए नियमों का पालन करना पड़ेगा। वहीं, दूसरी तरफ सूत्रों का कहना हैं कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां, मध्यवर्ती संस्थान और मंचों को उनके दायित्व और जरूरत के बीच फर्क पर जोर देना होगा। साथ ही इन कंपनियों को लागू होने वाले नियमों के तहत जरूरत और उनके दायित्वों का स्पष्ट रूप से उल्लेख करना पड़ेगा।  

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ जारी प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रमुख सोशल मीडिया मध्यवर्ती इकाइयों को उनके उपयोगकर्ताओं में एक्टिव रहने वाले मोबाइल नंबर्स की पुष्टि करनी होगी और उनका अलग से डाटा बनाना होगा। बता दें कि  इन प्रस्तावित संशोधनों को लेकर नियमों का मसौदा दिसंबर, 2018 में पेश किया गया था। वहीं, आईटी मंत्रालय में इस मुद्दे को लेकर कई बैठके भी हो चुकी हैं। 


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