Low-calorie Sweeteners Not Good In Pregnancy – Low-calorie sweeteners: गर्भावस्था में अच्छा नहीं है लो कैलोरी स्वीटनर का सेवन

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Low-calorie sweeteners: गर्भावस्था के दौरान लो कैलोरी स्वीटनर का सेवन आपके बच्चे के बॉडी फैट में वृद्धि और उनके आंतों के माइक्रोबायोटा को बाधित कर सकता है। जर्नल गट में प्रकाशित एक शोध में इस बात का खुलासा किया गया है।

Low-calorie sweeteners In Hindi: गर्भावस्था के दौरान लो कैलोरी स्वीटनर का सेवन आपके बच्चे के बॉडी फैट में वृद्धि और उनके आंतों के माइक्रोबायोटा को बाधित कर सकता है। जर्नल गट में प्रकाशित एक शोध में इस बात का खुलासा किया गया है। आंत माइक्रोबायोटा में खरबों बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव होते हैं जो आंतों के मार्ग में रहते हैं और हमारे स्वास्थ्य और कई बीमारियों के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार ये निष्कर्ष, महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे जीवन के महत्वपूर्ण प्रारंभिक वर्षों को प्रभावित करते हैं, खासकर गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान।

कनाडा के कैलगरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता रेलेने रीमर ने कहा कि कम कैलोरी मिठास का सेवन गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान सुरक्षित माना जाता है, हालांकि सबूत मानव अध्ययनों से यह पता चला है कि यह शरीर के वजन और अन्य हृदय जोखिम कारकों को बढ़ा सकते हैं।

रीमर ने कहा कि स्टीविया, जिसे एस्पार्टेम और अन्य कम कैलोरी कृत्रिम मिठास की जगह पर एक प्राकृतिक विकल्प के रूप में देखा जाता है, ने भी प्रारंभिक जीवन में बढ़ते हुए मोटापे के जोखिम पर एक समान प्रभाव दिखाया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एस्पार्टेम एक कृत्रिम स्वीटनर, और स्टीविया एक प्राकृतिक निम्न-कैलोरी स्वीटनर, दक्षिण अमेरिका के एक पौधे से निकाला जाता है, जो चीनी की तुलना में 200-400 गुना अधिक मीठा होता है।

उच्च मोटापे से बचने के लिए, महिलाओं और बच्चों में कम कैलोरी वाले मिठास का उपयोग बढ़ गया हैं। लेकिन इसकी बढ़ती खपत मोटापे के खतरे का बढ़ाती है।

रीमर ने कहा ने कहा कि मेटरनल मेटाबॉलिज्म और गट माइक्रोबायोटा पर आहार सामग्री के प्रभाव को समझना, इष्टतम मातृ आहार को परिभाषित करने में मदद कर सकता है, जो माँ और बच्चे दोनों के लिए एक स्वस्थ भविष्य को बढ़ावा देता है।

चूहों पर किए गए इस अध्ययन में, एक फैकल ट्रांसप्लांट का उपयोग मोटापे के बढ़ते जोखिम के कारण परिवर्तित आंत माइक्रोबायोटा के प्रत्यक्ष प्रभाव को दिखाने के लिए किया गया था। परिणामों में सामने आया कि कम कलौरी मिठास का सेवन करने वाली माताओं के बच्चों के वजन में वृद्धि होने के साथ ब्लड ग्लूकोज की मात्रा भी अधिक रही।

अध्ययन में कहा गया है कि भले ही संतानों ने कभी भी मिठास का सेवन नहीं किया हो, लेकिन माँ के माइक्रोबायोटा और चयापचय में बदलाव, उनकी संतानों में माइक्रोबायोटा को बदलने और मोटापे को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त थे।












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