Mononucleosis Mono Kissing Disease Symptoms Causes

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एक किस करना एक बीमारी को न्योता दे सकता है। यह है किसिंग डिसीज जो कि किस के दौरान मुंह से निकले लार की वजह से होती है। इस बीमारी के कारण शरीर में एप्सटीन-बार नाम का वायरस फैलने लगता है। यह वायरस शरीर में मोनोन्यूक्लिओसिस इन्फेक्शन फैलाता है और यह इन्फेक्शन लार के जरिए लोगों तक पहुंचता है। इससे एनिमिया, लिवर प्रॉब्लम, हेपेटाइटिस, जॉइन्डिस की समस्या हो जाती है। यह बीमारी किस करने के अलावा एक-दूसरे का जूठा खाने या जूठा पानी पीने की वजह से भी फैलाती है। यह वायरस लार में पाया जाता है, इसलिए अगर संक्रमित व्यक्ति का टूथब्रश इस्तेमाल किया या उनके साथ एक बर्तन में खाना खाया तो हो सकता है कि इसका शिकार हो जाएं। यह वायरस रक्त और वीर्य में भी होता है, इसलिए अंग प्रत्यारोपण या यौन संबंध से भी फैल सकता है।

मानव लार 98 प्रतिशत पानी से बनी है, जबकि बाकी बचा 2 प्रतिशत अन्य यौगिक जैसे इलेक्ट्रोलाइट, बलगम, जीवाणुरोधी यौगिक और एंजाइम होते हैं। भोजन पाचन की प्रक्रिया में शुरुआती हिस्से में लार के एंजाइम भोजन के कुछ स्टार्च और वसा को आणविक स्तर पर तोड़ते हैं। लार दांतों के बीच फंसे खाने को भी तोड़ती है और उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया से बचाती है। लेकिन लार में मौजूद वायरस अन्य के संपर्क में आने पर उन्हें भी संक्रमित कर सकता है।

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www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. अजय मोहन का कहना है कि एपस्टीन-बार वायरस के संकेतों को पहचानना जरूरी है, क्योंकि कई लोगों को यह वायरस होने पर भी बीमारी का एहसास नहीं होता है। इसमें थकान, बुखार, गले में खराश, भूख कम लगना, रैशेज, गले में सूजी हुई ग्रंथियां, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द रहता है।

वैसे तो एपस्टीन बार कुछ सप्ताह में अपने आप ही ठीक हो जाता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि अन्य वायरस की तरह इसे एंटीबायोटिक से ठीक नहीं किया जा सकता है। बेहतर होगा कि प्रभावित व्यक्ति इसके लक्षणों को कम करने की कोशिश करें। वे शरीर में पानी की कमी न होने दें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। तरल आहार लें। इससे प्रभावित लोगों को जितना हो सके आराम करना चाहिए। इस बीमारी के लक्षणों में गले में खराश भी शामिल हैं। इसलिए गले की खराश कम करने के लिए गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारा करें। बुखार और बदन दर्द से राहत पाने के लिए पेन किलर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

मोनोन्यूक्लिओसिस का कोई टीका मौजूद नहीं है। इस वायरस से संक्रमित होने पर लार में महीनों वायरस रह सकता है। अब भले ही कोई लक्षण न दिखे लेकिन किसी और व्यक्ति को संक्रमण हो सकता है। आमतौर पर इस बीमारी के लक्षणों को सामने आने में चार से आठ सप्ताह का समय लग सकता है। इसके प्रसार को रोकने का आसान तरीका है, हाथों को साफ रखें और किसी का जूठा न खाएं। यह रोग आमतौर पर टीनेजर्स में होता है, लेकिन यह किसी भी उम्र में शिकार बना सकता है।

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स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं
 


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