Mother Teresa – मदर टेरेसा

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मदर टेरेसा


मदर टेरेसा का जन्म 27 अगस्त 1910 को युगोस्लाविया में हुआ | उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था |उनके पिता स्टोरेकीपर का काम करते थे | बचपन से ही उनका ध्यान परोपकार और सेवा की ओर था |बचपन में भी जब वो किसी को दुखी देखती थी उनका दिल पिघल जाता था |वह दुखियो की सेवा में आनंद प्राप्त करती थी | वास्तव में उन्होने बचपन में ही यह महसूस कर लिया था की संसार स्वार्थ से भरपूर है |वह उसी की सेवा करता है जिससे उसे बदले में कुछ प्राप्त होने की उम्मीद होती है |
       “ होनहार बिरवान के होत चिकने पात “ की कहावत मदर टेरेसा पर पूरी तरह सच साबित होती है | उनके बचपन में ही यह स्पष्ट हो गया था की वह सांसरिक चकचोंध से दूर रहकर ईश्वर भक्ति को महत्व देती है | वह मानव सेवा के माध्यम से ही ईश्वर भक्ति करना पसंद करती थी |  मदर टेरेसा के जन्म से ही ऐसे संस्कार थे की वह सांसरिक सुखो से विमुख होकर दीनहीन जीवो की सेवा के माध्यम से ईश्वर भक्ति करे | जब मदर टेरेसा 12 वर्ष की थी तब उन्होने दार्जिलिंग के मिशनरियों के सेवा-भाव के संबंध में सुना था |उन्होने उसी दिन निर्णय कर लिया की वह भी मिशनिरी बनकर लोक कल्याण के लिए जन सेवा के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त करने का प्रयास करेगी |
       जब उन्होने संसार के स्वार्थ को घृणित रूप में पनपते देखा तो उन्होने भिक्षुणी बनने का निर्णय कर लिया | 18 वर्ष की आयु में उन्होने अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए चकचोंध वाले संसार के आराम को त्याग दिया |मदर टेरेसा भिक्षुणी बन चुकी थी उन्हे आजीविका प्राप्त करने की कोई चिंता नहीं थी |फिर भी उन्होने अध्यापिका के रूप में अपना जीवन आरम्भ करके समाज सेवा का श्री गणेश किया | उन्होने कोलकाता में सेंट मेरी हाई स्कूल में अध्यापिका के रूप में कार्य आरम्भ किया |
       मदर टेरेसा वेसे तो बचपन से ही दीन दुखियो और अपाहिजो की सेवा में समर्पित होना चाहती थी, परन्तु इस कार्य के लिए उन्हे यीशु मसीह की विशेष प्रेरणा ने प्रेरित किया | उनका संदेश सुनकर मदर टेरेसा ने अपने भावी जीवन की दिशा निश्चित कर ली | उन्होने गंदी बस्तियो में जाकर दीन-हीन लोगो की सेवा का व्रत लिया और इसके लिए पोप से आज्ञा और आशीर्वाद प्राप्त किया |
       अपने जीवन काल में अनेक बार ऐसा अनुभव किया की संसार में बहुत से ऐसे लोग है जिनका दुख का सहायक कोई नहीं है | मदर टेरेसा ने ऐसे लोगो की सेवा करने का बेड़ा उठाया | मदर टेरेसा ने सार्वजनिक रूप से यह सविकार कर लिया था की वह उन लोगो को प्यार करती है , जिनहे कोई भी प्यार नहीं करता,जो म्र्णास्न्न हे, अपाहिज है और दीन-हीन है |उन्होने सन 1950 में कोलकाता में “मिशनरीज आफ चेरिटी” की स्थापना की | यह संस्था रात दिन ऐसे लोगो की सेवा में लीन है जो लोग लाचार है या दीन-हीन है | उनका यह सेवा कार्य विश्व के 63 देशो में 244 केन्द्रो में चल रहा है | मदर टेरेसा को विश्व भर में अनेक संस्थाओ ने स्म्मानित किया है |

       इस प्रकार मदर टेरेसा ने तन, मन, धन से अपने आपको जन कल्याण के लिए समर्पित कर दिया | मदर टेरेसा में असंभव को संभव कर देने की अदभूत शक्ति थी |15 सितमबर 1997 को उन्होने इस संसार से विदा ले ली |  

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