Movie Review Subha Mangala Zyada Sabadhan, Ayushmann Khurrana – आयुष्मान खुराना की ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ देखने से पहले यहां पढ़ें मूवी रिव्यू

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निर्देशक: हितेश केवलिया
कलाकार: आयुष्मान खुराना, जीतेन्द्र कुमार, गजराज राव, नीना गुप्ता, मनुऋषि चड्ढा, सुनीता राजवर, मानवी गागरू, पंखुड़ी अवस्थी, नीरज सिंह और अन्य
लेखक: हितेश केवलिया
म्यूज़िक: तनिष्क बागची
गाने: वायु

रन टाइम: 117 मिनट
रेटिंग: 4/5 स्टार

किसी भी कलमकार, फिल्मकार की सबसे बड़ी ताकत होती है कि वह बहुत गंभीर मसलों को सरलता से कह जाए। यह फिल्म कुछ ऐसी ही है। इस फिल्म में भी लेखक और डायरेक्टर गंभीर मसले को बहुत ही मजेदार तरीके से प्रस्तुत करने में सफल हुए हैं। हर वर्ग के दर्शक को यह मजेदार कॉमेडी फिल्म लुभाएगी। फिल्म के हर सीन में दर्शकों को हंसने के लिए ढेर सारा मसाला मिलेगा और सोचने के लिए जमीन भी। इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है कि गंभीर मसले पर बनाई गई यह फिल्म एक बार भी गंभीर नहीं होती। माता-पिता, चाचा, चाची भाई, बहन के हंसी मजाक करते-करते समाज को एक संदेश दे जाती है यह फिल्म। फिल्म के सभी गाने बेहतर बन पड़े हैं। कहते हैं कि साहित्य समाज को आगे ले जाता है, तो यह फिल्म भी साहित्य है, जो समाज को थोड़ा ही सही पर आगे जरूर ले जाएगी।

कहानी
कहानी मध्यम वर्ग के त्रिपाठी परिवार की है। जो दो समलैंगिक युवकों अमन त्रिपाठी (जीतेन्द्र कुमार) और कार्तिक (आयुष्मान खुराना) को लेकर आगे बढ़ती है। ये दोनों रिलेशन में हैं। अमन अपनी बहन की शादी में अपने पार्टनर कार्तिक के साथ पहुंचता है। त्रिपाठी परिवार में चाचा—चाची और उनकी बेटी है, जिसकी शादी नहीं हो रही है। सभी एक से बढ़कर हैं। रोज के मजेदार घरेलू झगड़े कहानी की जान हैं। ट्रेन में कार्तिक और अमन को किस करते हुए अमन के पिता शंकर त्रिपाठी (गजराज राव) देख लेते हैं। पिता की दुनिया ही पलट जाती है। वे इस रिश्ते की सोच-सोच कर उल्टियां करने लगते हैं। इसके बाद वे अमन को पानी के पाइप से धो कर साफ करना चाहते हैं। वे किसी भी कीमत पर अपने बेटे के समलैंगिक संबंध को स्वीकार नहीं कर पाते। उनकी पत्नी सुनयना (नीना गुप्ता) कभी समझतीं हैं, कभी नहीं समझतीं। समझने-समझाने, अस्वीकार और स्वीकार के साथ कहानी को बहुत ही मजेदार तरीके से पेश किया गया है। आगे की कहानी के लिए फिल्म देखनी होगी।

डायलाग पंच
संवाद ही फिल्म की जान हैं। हर फ्रेम में बेहतर और मजेदार डॉयलॉग फिल्म को बेहतर बनाते हैं। ‘हम गंदे लोग नहीं हैं, हम अच्छे भी नहीं हैं, हम बस लोग हैं।,’जो प्यार इनके दिमाग में फिट होता, वह दबा देते हैं’ और ‘हमें नहीं पता हम यह समझ पाएंगे या नहीं, पर हमारी समझ के चलते आधी अधूरी जिंदगी मत जीना… जा सिमरन’ हल्के फुल्के अंदाज में कहे गए गंभीर डॉयलाग मन को छू लेते हैं। फिल्म का हर संवाद बेहतर है।

डायरेक्शन
सधा हुआ डायरेक्शन फिल्म को बेहतरीन कैटगिरी में खड़ा करता है। फिल्म की खूबसूरती यह है कि कैमरे को सिर्फ आयुष्मान पर फोकस नहीं किया गया। डायरेक्टर ने बहुत कम समय में फिल्म में मौजूद ज्यादातर किरदारों की कहानी कह दी है। इस फिल्म की खूबी कहें यह डायेक्टर का कमाल, इसमें मौजूद हर किरदार एक तरह का हीरो है। सबका अपना वजूद फिल्म में नजर आया है। हर फ्रेम को सलीके से बनाया गया है। बेटे को लड़के के साथ किस करते देखने के बाद उल्टी आना और पानी के पाईप से उसे धोना जैसे दृश्य फिल्म को मजबूत बनाते हैं।

एक्टिंग
कह सकते हैं कि एक्टिंग के मामले में यह फिल्म आयुष्मान की दूसरी फिल्मों से अलग है। क्योंकि इस फिल्म में उन पर फिल्म उठाने का बोझ नहीं था। कहीं ऐसा नहीं लगता कि यह फिल्म सिर्फ आयुष्मान खुराना की फिल्म है। इस बार कुछ जगहों पर आयुष्मान पिछली फिल्म की तरह एक्टिंग करते भी नजर आए। दूसरे कलाकारों की बेहतर मौजूदगी फिल्म को बेहतरीन बनाती है। मोतियों की तरह पिरोई गई इस फिल्म में हर किसी ने अपने किरदार से फिल्म को पूरा किया/आगे बढ़ाया है। इसके श्रेय हर किरदार को जाता है।

क्यों देखें
यह बहुत मजेदार कॉमेडी फिल्म है, सो अगर हंसना है तो जाइए। यह पारिवारिक मूल्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप भी दिखाती है। इसमें संयुक्त परिवार के झगड़े, प्यार, कमजोरियां, ताकत और एकता सब कुछ बहुत मजेदार तरीके से दिखाया गया है, देखना है तो जाइए।


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