Nitin Bose Movies, Filmography, Biography And Songs – प्रेमचंद की कहानियों की तरह भारतीय परिवेश का सजीव चित्रण करते थे नितिन बोस

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हिन्दी और बांग्ला फिल्मों के प्रमुख फिल्मकारों में गिने जाने वाले नितिन बोस बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी फिल्मों में भारतीय परिवेश का उसी तरह सजीव चित्रण होता था, साहित्य में जिसके लिए प्रेमचंद की कहानियां लोकप्रिय हैं। नितिन बोस की बांग्ला फिल्म ‘भाग्य चक्र’ (1935) से भारतीय सिनेमा में पार्श्व गायन की शुरुआत हुई। बाद में उन्होंने इसे हिन्दी में ‘धूप छांव’ नाम से बनाया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘चंडीदास’ (1934), प्रेसिडेंट (1937), दुश्मन (1939), मिलन (1946), मशाल (1950), दीदार (1951), कठपुतली (1957) और ‘गंगा जमुना’ (1961) शामिल हैं। जन्मभूमि कोलकाता में 14 अप्रेल, 1986 को उन्होंने आखिरी सांस ली।

बड़ी निर्माण कंपनियों के लिए बनाईं फिल्में
नितिन बोस ने ज्यादातर फिल्में उस दौर की बड़ी निर्माण कंपनियों न्यू थिएटर्स, बॉम्बे टाकीज और फिल्मिस्तान के लिए बनाईं। सोहराब मोदी की मिनर्वा मूवीटोन के लिए उन्होंने ‘दर्दे-दिल’ का निर्देशन किया। बोस की ‘दृष्टिदान’ (1948) उत्तम कुमार की पहली फिल्म थी, जो बाद में बांग्ला सिनेमा के सुपर स्टार बने।

क्लासिक का दर्जा रखती है ‘गंगा जमुना’
नितिन बोस के निर्देशन में बनी ‘गंगा जमुना’ क्लासिक फिल्म है, जिसमें पहली बार दो ऐसे भाइयों की कहानी पेश की गई, जिनमें से एक (दिलीप कुमार) को हालात अपराधी बना देते हैं, जबकि दूसरा (नासिर खान) कानून का रक्षक है। कई साल बाद इसी कहानी से प्रेरणा लेकर यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन और शशि कपूर को लेकर ‘दीवार’ बनाई। ‘गंगा जमुना’ के ‘इंसाफ की डगर पे बच्चों दिखाओ चलके’, ‘नैन लड़ जहिएं’, ‘दो हंसों का जोड़ा बिछुड़ गयो’ और ‘ढूंढो ढूंढो रे साजना’ जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं।

1978 में मिला फाल्के अवॉर्ड
सत्यजीत रे के चचेरे भाई नितिन बोस कुशल सिनेमाटोग्राफर भी थे। उन्होंने कई फिल्मों की सिनेमाटोग्राफी की। सिनेमा को उनके विशिष्ट योगदान के लिए 1978 में भारत सरकार ने उन्हें फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया। उनकी याद में 2013 में डाक टिकट जारी किया गया था।


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