Not only cough do not ignore weight loss continuously may be symptoms of TB

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फेफड़े शरीर का महत्वपूर्ण अंग हैं और व्यक्ति रोजाना करीब 23 हजार बार सांस लेता है। जितनी ज्यादा ऑक्सीजन हर सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचती है, शरीर उतना ही सेहतमंद रहता है। इसलिए फेफड़ों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। वहीं टीबी ऐसी बीमारी है जो सीधा फेफड़ों से जुड़ी है। टीवी यानी क्षय रोग जिन जीवाणुओं के कारण होता है, उसे माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस कहा जाता है। यह जीवाणु फेफड़ों पर तो हमला करता ही है, अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। हवा के माध्यम से फैलने वाले इस रोग में पीड़ित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो हवा के जरिए किसी अन्य व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है, क्योंकि इसके साथ ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होता है और ये कई घंटों तक वातावरण में सक्रिय रहता है। 

ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई का मतलब है हवा में नमी के साथ तैरने वाले जीवाणु हैं, जो बीमारी को एक इन्सान से दूसरे इन्सान में फैलाते हैं। जब कोई व्यक्ति इनके संपर्क में आता है तो संक्रमित हो सकता है। टीबी दो तरह के होती है- एक सुप्त अवस्था में और दूसरे सक्रिय अवस्था में।

संक्रमण सुप्त अवस्था में होता है तो कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और यह ज्यादा संक्रामक और घातक नहीं है। लेकिन सक्रिय टीबी में जीवाणु शरीर में सक्रिय अवस्था में रहता है और इससे दूसरे व्यक्ति भी संक्रमित होते हैं। टीबी के बारे में पता चलने में लोगों को कई सप्ताह लग जाते हैं। कई बार बिना लक्षण दिखे ही व्यक्ति इसका शिकार हो जाता है।

www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. अजय मोहन का कहना है कि टीबी होने के संकेत हैं- खांसी के साथ बलगम में खून आना, थकान, बुखार, रात में पसीना, छाती में दर्द, सांस फूलना, भूख ना लगना, वजन कम होना, मांसपेशियों में क्षति। यह बीमारी वैसे तो फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन अन्य अंग जैसे किडनी, रीढ़ और मस्तिष्क पर अभी असर डालती है। इस बीमारी के विकसित होने के कारणों में जीवनशैली भी शामिल है। अन्य कारणों में बच्चे और बुजुर्गों जिनका इम्यून सिस्टम यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम होती है, किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ ज्यादा समय तक रहना, शराब पीना आदि शामिल हैं।

बेहतर होगा कि चेहरे पर मास्क का उपयोग करें, मुंह ढक कर रखें। कमरे में वेंटीलेशन (जहां आसानी से हवा आ जा सके) का इस्तेमाल करने से भी बैक्टीरिया को फैलने से रोका जा सकता है। हमेशा खांसने या छींकने के दौरान मुंह पर रुमाल या टिश्यू रखें। खांसने या छींकने के बाद हाथों को धोएं। ताजा हवा बनाए रखने के लिए पंखे का इस्तेमाल करें और खिड़कियां खुली रखें। साफ-सफाई का ध्यान रखने के साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखने से भी टीबी  के संक्रमण से बचा जा सकता है। ताजे फल, सब्जियां और कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन आदि का सेवन कर बीमारियों से लड़ने की ताकत को बढ़ाया जा सकता है।

इस बात का ध्यान रखें कि टीबी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से शिशुओं के बैसिलस कैल्मेट-ग्यूरिन (बीसीजी) नाम दवा का टीका लगाएं। डॉक्टर की सलाह के बाद ही ऐसा करें। इससे बच्चों में संक्रमण का जोखिम 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। टीबी रोग का इलाज जितनी जल्दी शुरू होगा, उतनी जल्दी ही रोग से निदान मिलेगा। टीबी के जीवाणु मारने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इलाज और सावधानियों के बाद टीवी से निजात मिल सकती है। यह उपचार विफल तब होता है जब दवाएं उचित और नियमित रूप से न ली जाएं। इसलिए समय रहते डॉक्टर को दिखाएं और दवाएं लें।

अधिक जानकारी के लिए देखें : https://www.myupchar.com/disease/cough

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं, जो सेहत संबंधी भरोसेमंद जानकारी प्रदान करने वाला देश का सबसे बड़ा स्रोत है।


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