Not only players common man can also be the victim of Repetitive Strain Injury know the preservative measures to save yourself

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हमने अक्सर खिलाड़ियों के बारे में सुना है कि उन्हें रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी हो गई है। यानी एक ही तरह का काम बार-बार करने पर उस अंग या मांसपेशियों पर असर पड़ना और उसका खराब हो जाना। एम्स के डॉ. केएम नाधीर के अनुसार, दुनिया में 50 फीसदी खिलाड़ियों को रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी होती है, क्योंकि वे एक ही क्रिया को बार-बार दोहराते हैं। इस दोहराव के कारण चोट लगती है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। 

खिलाड़ियों नहीं नहीं, आम इंसानों के साथ भी ऐसा हो सकता है। जो लोग एक ही स्थिति में रहकर घंटों काम करते हैं या उनके काम करते समय एक ही अंग पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है, उन्हें इसका खतरा रहता है। जो लोग कम्प्यूटर या डेस्क पर घंटों काम करते हैं, उनमें रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी की आशंका अधिक रहती है। यह चोट स्थायी या अस्थायी हो सकती है। इसके कारण मांसपेशियों के साथ नसों, लिगामेंट और टेंडन को भी नुकसान होता है।

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी से होती हैं ये बीमारियां
बार-बार ज्यादा लोड पड़ने से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और फिर उसी स्थान पर बार-बार चोट लगने से फैक्चर हो सकता है। ऑफिस में काम करने वालों को सर्वाइकल की बीमारी हो सकती है, क्योंकि उनकी गर्दन पर सबसे ज्यादा जोर पड़ता है। रीड की हड्डी भी इसकी चपेट में आ सकती है। रीड की हड्डी की स्थिति बिगड़ने पर इंसान पूरी तरह से अपाहिज हो सकता है। 

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी का सबसे बड़ा लक्षण है जोड़ों में दर्द। यदि अधिक शारीरिक श्रम करने वालों की घुटने, टखने और कलाई के जोड़ों में दर्द हो रहा है तो सजग हो जाएं। हाथ पैर में झुनझुनी और मांसपेशियों की सूजन भी इस बीमारी के लक्षण हैं। जो लोग कम तापमान में काम करते हैं, उन्हें भी सजग रहना चाहिए।

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी से ऐसे बचें-
रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी से बचने के लिए खुद का ख्याल रखना जरूरी है। कोई ऐसा काम कर रहे हैं, जिससे एक ही अंग या अंगों पर जोर पड़ता है तो बीच-बीच में आराम करें। लगातार एक ही स्थिति में न बैठें। व्यायाम को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। मांसपेशियों की मजबूती पर ध्यान दें।

डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के कई आसान और असरदार घरेलू उपाय हैं। ठंड के दिनों में अंडे खा सकते हैं। जिन अंगों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है, उनकी नियमित मालिश करें। सरसों के तेल की मालिश करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। सिकाई करें। 

विटामिन डी युक्त आहार खाएं। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम को पचाता है और यही कैल्शियम हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत करता है। सर्दियों में धूप सेकना फायदेमंद होता है। दूध का नियमित सेवन करें। आंवला भी बहुत फायदा पहुंचाता है। केला खाएं।

यदि घरेलू तरीकों से आराम नहीं मिले तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। डॉ. केएम नाधीर के अनुसार, फिजिरोथेरेपी इसका कारगर इलाज है।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/repetitive-stress-injury


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