Pak Expected To Retain In Fatf Grey List As It Has Not Take Adequate Step To Counter Terror Finance – एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाक! आतंक पर नहीं की ठोस कार्रवाई

0
39


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 01 Feb 2020 08:14 AM IST

पाक पीएम इमरान खान (फाइल फोटो)
– फोटो : ANI

ख़बर सुनें

पाकिस्तान के वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में ही रहने की उम्मीद है। अतंरराष्ट्रीय वाचडॉग की आगामी बैठक में यह फैसला लिया जा सकता है। इसकी वजह है पाकिस्तान द्वारा आतंक के वित्तपोषण को रोकने के लिए पर्याप्त कदम न उठाना। यह जानकारी यूरोपीय देशों के दो राजनयिकों ने दी है।

एफएटीएफ की पेरिस में 16 से 21 फरवरी को कामकाजी समूह की बैठक होनी है। वह पाकिस्तान के 27 बिंदु वाले एक्शन प्लान के कार्यान्वयन का आकलन करेंगे। पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में रखा गया था क्योंकि वह लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, तालिबान और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों को फंड जुटाने से रोकने में नाकाम रहा था।

यूरोपीय देश के एक राजनयिक ने कहा, ‘उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप अपने आतंकी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों को लाने और अपने कानूनी ढांचे में सुधार करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। लेकिन उसने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों पर आतंकी वित्तपोषण में संलिप्तता के लिए उनपर मुकदमा चलाने या दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। माना जा रहा है कि वह ग्रे सूची में ही बना रहेगा।’

यूरोपीय देश के दूसरे राजनयिक जो आतंक के वित्तपोषण को समाप्त करने के पाकिस्तान के प्रयासों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, उन्होंने कहा कि देश के एफएटीएफ की अक्तूबर में होने वाली अगली पूर्ण बैठक तक ग्रे सूची में रहने की उम्मीद है क्योंकि उसने कार्य योजना को लागू करने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। वहीं भारतीय अधिकारियों ने इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्या है एफएटीएफ, जो आतंकी फंडिंग मामले में पाक को करेगा ब्लैकलिस्ट

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगाह रखना है। 

इसके अलावा एफएटीएफ वित्त विषय पर कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा भी देता है। एफएटीएफ का निर्णय लेने वाला निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।

पाकिस्तान के वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में ही रहने की उम्मीद है। अतंरराष्ट्रीय वाचडॉग की आगामी बैठक में यह फैसला लिया जा सकता है। इसकी वजह है पाकिस्तान द्वारा आतंक के वित्तपोषण को रोकने के लिए पर्याप्त कदम न उठाना। यह जानकारी यूरोपीय देशों के दो राजनयिकों ने दी है।

एफएटीएफ की पेरिस में 16 से 21 फरवरी को कामकाजी समूह की बैठक होनी है। वह पाकिस्तान के 27 बिंदु वाले एक्शन प्लान के कार्यान्वयन का आकलन करेंगे। पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में रखा गया था क्योंकि वह लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, तालिबान और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों को फंड जुटाने से रोकने में नाकाम रहा था।

यूरोपीय देश के एक राजनयिक ने कहा, ‘उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप अपने आतंकी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों को लाने और अपने कानूनी ढांचे में सुधार करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। लेकिन उसने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों पर आतंकी वित्तपोषण में संलिप्तता के लिए उनपर मुकदमा चलाने या दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। माना जा रहा है कि वह ग्रे सूची में ही बना रहेगा।’

यूरोपीय देश के दूसरे राजनयिक जो आतंक के वित्तपोषण को समाप्त करने के पाकिस्तान के प्रयासों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, उन्होंने कहा कि देश के एफएटीएफ की अक्तूबर में होने वाली अगली पूर्ण बैठक तक ग्रे सूची में रहने की उम्मीद है क्योंकि उसने कार्य योजना को लागू करने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। वहीं भारतीय अधिकारियों ने इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्या है एफएटीएफ, जो आतंकी फंडिंग मामले में पाक को करेगा ब्लैकलिस्ट

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगाह रखना है। 

इसके अलावा एफएटीएफ वित्त विषय पर कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा भी देता है। एफएटीएफ का निर्णय लेने वाला निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here