Pakistan Exposed: Kartarpur Sahib Gurudwara 8 Domes Fell In Minor Storm – पाकिस्तान: मामूली आंंधी में गिर गए करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के गुंबद, सिख नाराज 

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पाकिस्तान लाख राग अलापता रहे कि वह अपने यहां सिख समुदाय को बराबरी और सम्मान का हक देता है, लेकिन हर बार उसकी पोल खुल ही जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के आठ गुंबद शनिवार को मामूली आंधी में ढह गए। इनका पुनर्निर्माण दो साल 2018 में ही हुआ था। 
 

इस घटना के बाद अब इसकी निर्माण की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। पाकिस्तान में सिख समुदाय भी इससे काफी नाराज है। इनका कहना है कि इमरान खान सरकार में किसी अन्य मजहब को सम्मान नहीं मिलता। लोगों का आरोप है कि इमरान खान के लिए करतारपुर सिर्फ एक सियासी स्टंट था। 

इस गुरुद्वारे का पुनरुद्धार दो साल पहले ही 2018 में हुआ था। इमरान सरकार ने यहां जोर-शोर से कार्यक्रम भी आयोजित करवाया था, लेकिन अब पता चला है कि निर्माण की गुणवत्ता कितनी खराब थी कि ये हल्के आंधी-तूफान को ही नहीं झेल सके। बताया जा रहा है कि ये कमजोर फाइबर के बने थे। 

बता दें कि पाकिस्तान में सिखों के दो पवित्र तीर्थ स्थल हैं। पहला ननकाना साहिब जो लाहौर से लगभग 75 किलोमीटर दूर है। ये गुरु नानक देव जी का जन्मस्थल है। दूसरा है करतारपुर जहां गुरु नानकदेव अंतरध्यान हुए थे। यह स्थान लाहौर से लगभग 117 किलोमीटर दूर है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर कॉरीडोर बनाया गया था।

भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करतारपुर 3.80 किलोमीटर दूर है। पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने अपने-अपने देशों में इसका उद्घाटन किया था। गुरु नानक देव जी अपनी चार प्रसिद्ध यात्राओं को पूरा करने के बाद 1522 में परिवार के साथ यहां रहने लगे थे।

पाकिस्तान लाख राग अलापता रहे कि वह अपने यहां सिख समुदाय को बराबरी और सम्मान का हक देता है, लेकिन हर बार उसकी पोल खुल ही जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के आठ गुंबद शनिवार को मामूली आंधी में ढह गए। इनका पुनर्निर्माण दो साल 2018 में ही हुआ था। 

 

इस घटना के बाद अब इसकी निर्माण की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। पाकिस्तान में सिख समुदाय भी इससे काफी नाराज है। इनका कहना है कि इमरान खान सरकार में किसी अन्य मजहब को सम्मान नहीं मिलता। लोगों का आरोप है कि इमरान खान के लिए करतारपुर सिर्फ एक सियासी स्टंट था। 

इस गुरुद्वारे का पुनरुद्धार दो साल पहले ही 2018 में हुआ था। इमरान सरकार ने यहां जोर-शोर से कार्यक्रम भी आयोजित करवाया था, लेकिन अब पता चला है कि निर्माण की गुणवत्ता कितनी खराब थी कि ये हल्के आंधी-तूफान को ही नहीं झेल सके। बताया जा रहा है कि ये कमजोर फाइबर के बने थे। 

बता दें कि पाकिस्तान में सिखों के दो पवित्र तीर्थ स्थल हैं। पहला ननकाना साहिब जो लाहौर से लगभग 75 किलोमीटर दूर है। ये गुरु नानक देव जी का जन्मस्थल है। दूसरा है करतारपुर जहां गुरु नानकदेव अंतरध्यान हुए थे। यह स्थान लाहौर से लगभग 117 किलोमीटर दूर है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर कॉरीडोर बनाया गया था।

भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करतारपुर 3.80 किलोमीटर दूर है। पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने अपने-अपने देशों में इसका उद्घाटन किया था। गुरु नानक देव जी अपनी चार प्रसिद्ध यात्राओं को पूरा करने के बाद 1522 में परिवार के साथ यहां रहने लगे थे।


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