Pakistan Is In Tension Due To Non-fulfillment Of Fatf Quorum – एफएटीएफ का कोरम पूरा न कर पाने के कारण …फंस गया है पाकिस्तान

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पाक पीएम इमरान खान (फाइल फोटो)
– फोटो : ANI

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भारतीय कूतिनीतिज्ञों का अनुमान है कि पड़ोसी देश जबतक आतंकवाद के विरुद्ध ठोस कदम नहीं उठाता, उसका बाहर आना मुश्किल है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय बॉडी है। इसने सवाल उठाया है तो पाकिस्तान को इसके कुछ कॉलम पूरे करने होंगे।

सूत्र का कहना है कि भारत पाकिस्तान का एफएटीएफ में विरोध कर रहा है। हमारे विरोध का आधार है। पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकी संगठनों को न केवल सहायता बल्कि वित्तीय मदद देता है। वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान की आतंकियों को यह वित्तीय मदद और संरक्षण अब कोई छिपी बात नहीं है। 

एफएटीएफ ने जब उसे ग्रे सूची में डाला था तो अंतरराष्ट्रीय बॉडी ने पाकिस्तान को जून 2020 तक इससे बाहर आने के लिए कुछ शर्तों के अनुपालना की उम्मीद की थी। बताते हैं जब एफएटीएफ की उच्चस्तरीय बैठक होती है तो उसमें प्वाइंट दर प्वाइंट, कॉलम दर कॉलम मुद्दा उठता है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

तुर्की, चीन, मलेशिया समेत अन्य को भी करना होगा पालन

एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर आने का ममला पाकिस्तान के लिए इतना आसान नहीं है। सूत्र का कहना है कि तुर्की के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान चाहे जो राजनीतिक बयान दे दिया हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। 

सूत्र का कहना है कि यही वजह है कि बैठक में पाकिस्तान का साथ एक दो जो भी देश देना चाह रहे हैं, उनके लिए बड़ी मुश्किल हो रही है। चीन और दुबई भी इसमें कोई निर्णायक भूमिका अभी नहीं निभा सके हैं। सूत्र का कहना है कि एफएटीएफ का मामला काफी जटिल है। इसलिए पाकिस्तान को न्यूनतम मानदंडों का पालन करना ही होगा।

भारत ने लगाया पूरा जोर

भारत ने पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को की जा रही वित्तीय मदद और संरक्षण का मुद्दा काफी पहले से अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। मुंबई में 26 नवंबर को हुए आतंकी हमले के बाद मिले सबूतों को आधार बनाकर भारत ने पाकिस्तान को तेजी से घेरा शुरू किया था। 

भारत की यह कोशिश पाकिस्तान को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद रोकने के लिए रही। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद का उपयोग अपनी जमीन से भारत के विरोध आतंकी संगठनों को संरक्षण तथा उन्हें वित्तीय मदद देने में करता है। 

इसी बिना पर अमेरिका समेत अन्य देशों भी पाकिस्तान को आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कर्रवाई करने के लिए दबाव बना रहे हैं। बताते हैं भारत ने अपनी इस मुहिम को जारी रखा है। 

एफएटीएफ में भी भारत लगातार पाकिस्तान के आतंकवाद के विरुद्ध सदस्य देशों का सहयोग और समर्थन जुटा रहा है। बताते हैं इसी लॉबिंग का नतीजा रहा है कि एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को  उसके अनुमानित सहयोगी देशों का भी खुलकर समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

सार

एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) पाकिस्तान के गले का नया फंदा है। वह इसकी ग्रे लिस्ट में है। यदि पाकिस्तान इससे बाहर नहीं आता तो उनकी अर्थव्यवस्था का पूरी तरह से बैठ जाना तय है।

विस्तार

भारतीय कूतिनीतिज्ञों का अनुमान है कि पड़ोसी देश जबतक आतंकवाद के विरुद्ध ठोस कदम नहीं उठाता, उसका बाहर आना मुश्किल है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय बॉडी है। इसने सवाल उठाया है तो पाकिस्तान को इसके कुछ कॉलम पूरे करने होंगे।

सूत्र का कहना है कि भारत पाकिस्तान का एफएटीएफ में विरोध कर रहा है। हमारे विरोध का आधार है। पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकी संगठनों को न केवल सहायता बल्कि वित्तीय मदद देता है। वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान की आतंकियों को यह वित्तीय मदद और संरक्षण अब कोई छिपी बात नहीं है। 

एफएटीएफ ने जब उसे ग्रे सूची में डाला था तो अंतरराष्ट्रीय बॉडी ने पाकिस्तान को जून 2020 तक इससे बाहर आने के लिए कुछ शर्तों के अनुपालना की उम्मीद की थी। बताते हैं जब एफएटीएफ की उच्चस्तरीय बैठक होती है तो उसमें प्वाइंट दर प्वाइंट, कॉलम दर कॉलम मुद्दा उठता है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

तुर्की, चीन, मलेशिया समेत अन्य को भी करना होगा पालन

एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर आने का ममला पाकिस्तान के लिए इतना आसान नहीं है। सूत्र का कहना है कि तुर्की के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान चाहे जो राजनीतिक बयान दे दिया हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। 

सूत्र का कहना है कि यही वजह है कि बैठक में पाकिस्तान का साथ एक दो जो भी देश देना चाह रहे हैं, उनके लिए बड़ी मुश्किल हो रही है। चीन और दुबई भी इसमें कोई निर्णायक भूमिका अभी नहीं निभा सके हैं। सूत्र का कहना है कि एफएटीएफ का मामला काफी जटिल है। इसलिए पाकिस्तान को न्यूनतम मानदंडों का पालन करना ही होगा।

भारत ने लगाया पूरा जोर

भारत ने पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को की जा रही वित्तीय मदद और संरक्षण का मुद्दा काफी पहले से अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। मुंबई में 26 नवंबर को हुए आतंकी हमले के बाद मिले सबूतों को आधार बनाकर भारत ने पाकिस्तान को तेजी से घेरा शुरू किया था। 

भारत की यह कोशिश पाकिस्तान को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद रोकने के लिए रही। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद का उपयोग अपनी जमीन से भारत के विरोध आतंकी संगठनों को संरक्षण तथा उन्हें वित्तीय मदद देने में करता है। 

इसी बिना पर अमेरिका समेत अन्य देशों भी पाकिस्तान को आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कर्रवाई करने के लिए दबाव बना रहे हैं। बताते हैं भारत ने अपनी इस मुहिम को जारी रखा है। 

एफएटीएफ में भी भारत लगातार पाकिस्तान के आतंकवाद के विरुद्ध सदस्य देशों का सहयोग और समर्थन जुटा रहा है। बताते हैं इसी लॉबिंग का नतीजा रहा है कि एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को  उसके अनुमानित सहयोगी देशों का भी खुलकर समर्थन नहीं मिल पा रहा है।


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