Peoples Thinking About Sex In Ancient India – प्राचीन भारत में सेक्स को लेकर कितनी खुली हुई थी लोगों की सोच?

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लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली, Updated Sat, 01 Feb 2020 09:30 PM IST

‘कामसूत्र’ के रचयिता वात्स्यायन से कई सौ साल पहले यूनानी साहित्य में काम की अवधारणा पर व्यापक चर्चा हुई थी। प्लेटो का मानना था कि ‘काम किसी पर अधिकार जमाने की आकांक्षा है’। ‘सिम्पोजियम’ में यूनानी नाटककार अरिस्टोफैंस ने भी एक ऐसे समय का जिक्र किया था जब मानव अपने आप में परिपूर्ण हुआ करता था और उसे किसी दूसरे की जरूरत नहीं पड़ती थी।

नतीजा ये हुआ कि वो बहुत शक्तिशाली हो गया और देवताओं तक को चुनौती देने लगा। लेकिन देवताओं के राजा जायस ने इससे निपटने का एक तरीका निकाला और मानव को पुरुष और स्त्री दो भागों में बांट दिया। जिसका नतीजा ये हुआ कि मानव सीधा खड़ा होने लगा, दो पैरों पर चलने लगा और ऐसा लगने लगा कि उसके सामने के अंग विभाजित हो गए।


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