Ranji Trophy Saurashtra Became Champions In Fourth Attempt – Ranji Trophy : चौथे प्रयास में सौराष्ट्र बना चैम्पियन, 70 साल से हाथ लग रही थी निराशा

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सौराष्ट्र क्रिकेट टीम के कप्तान Jaydev Unadkat ने सात दशक बाद रणजी विजेता बनने पर कहा कि टीम के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात ओर कुछ हो ही नहीं सकती।

राजकोट : रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) को इस बार नया विजेता मिला है। सौराष्ट्र की टीम ने रणजी ट्रॉफी 2019-20 के फाइनल मुकाबले में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी के खिताब पर कब्जा जमाया। सौराष्ट्र ने अपनी पहली पारी में 425 रन बनाया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल की टीम को पहली पारी में 381 रनों पर ऑलआउट कर दिया। फाइनल मैच के अंतिम दिन दूसरी पारी में सौराष्ट्र ने चार विकेट पर 105 रन बनाए। इस तरह यह मैच अनिर्णीत समाप्त हुआ, लेकिन पहली पारी में मिले 24 रनों की बढ़त की बदौलत सौराष्ट्र की टीम ने ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। रणजी ट्रॉफी के 85 साल के इतिहास में सौराष्ट्र पहली बार चैम्पियन बनी है। अगर सौराष्ट्र की टीम की बात करें तो उसका गठन 70 साल पहले हुआ था।

सौराष्ट्र की जीत के नायक रहे वासवड़ा

सौराष्ट्र की पहली पारी में अर्पित वासवड़ा (106) ने शानदार शतक लगाया था। उनके अलावा चेतेश्वर पुजारा (66), विकेटकीपर बल्लेबाज अवि बरोट (54) और विश्वराज जडेजा (54) ने अर्धशतकीय पारी खेली थी। वहीं दूसरी पारी में बरोट ने 39 रनों का योगदान दिया था। गेंदबाजी की बात करें तो बंगाल को 381 रनों पर निबटाने में धर्मेंद्रसिंह जडेजा का अहम योगदान रहा था। उन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए। उनके अलावा कप्तान जयदेव उनादकट और प्रेरक मांकड़ ने दो-दो तथा चेतन सकारिया और चिराग जानी ने एक-एक विकेट लिया था। वहीं बंगाल का एक बल्लेबाज रन आउट हुआ था।

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बंगाल की ओर से तीन बल्लेबाजों ने लगाया अर्धशतक

वहीं बंगाल की टीम ने अपनी पहली पारी में सुदीप चटर्जी (81), वृद्धिमान साहा (64) और अनुस्तूप मजूमदार की अर्धशतकों की मदद से 381 रनों तक ही पहुंच सका और पहली पारी के आधार पर सौराष्ट्र की ओर से 24 रन पीछे रहकर खिताब जीतने से चूक गया।

बंगाल के गेंदबाजों की बात करें तो सौराष्ट्र की पहली पारी में आकाशदीप ने चार, शाहबाद अहमद ने तीन, मुकेश कुमार ने दो और ईशान पोरेल ने एक विकेट निकाले, जबकि दूसरी पारी में शाहबाज ने दो, आकाशदीप तथा सुदीप चटर्जी ने एक-एक विकेट लिया। सौराष्ट्र का एक खिलाड़ी रन आउट हुआ।

70 साल में पहली बार सौराष्ट्र बना चैम्पियन

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का गठन 1929 में हुआ था और पहली रणजी ट्रॉफी 1934-35 में खेला गया था। तब से लेकर 1950 तक सौराष्ट्र की टीम रणजी का हिस्सा नहीं थी। क्योंकि सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन का गठन ही 1950 में किया गया था। इसके बाद से यह टीम लगातार रणजी खेल रही है, लेकिन 2012-13 में पहली बार फाइनल में पहुंची थी। इस साल मुंबई ने फाइनल में सौराष्ट्र को पटखनी दी थी। इन आठ सालों के बीच वह चार बार फाइनल में पहुंची और अपने चौथे प्रयास में विजेता बनने में सफल रही। बता दें कि पिछले साल भी सौराष्ट्र की टीम रणजी फाइनल खेली थी, लेकिन विदर्भ की टीम ने इसे हराकर पहली बार विजेता बनने का सपना तोड़ दिया था। इसके अलावा सौराष्ट्र की टीम 2015-16 में फाइनल खेली, लेकिन उसके विजेता बनने के सपने में एक बार फिर मुंबई आ गई थी।

तीन बार इन नामों से खेल चुकी है फाइनल

आजादी से पहले सौराष्ट्र क्षेत्र से नवानगर की टीम फाइनल में खेलती थी। 1936-37 में नवानगर की टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची थी और जीती थी। इसके बाद अगले ही साल 1937-38 में भी नवानगर टीम फाइनल में पहुंची थी, लेकिन इसे हैदराबाद के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 1943-44 में वेस्टर्न इंडिया स्टेट्स क्रिकेट एसोसिएशन (WISCA) के नाम से जीत दर्ज की थी।

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कप्तान उनादकट ने जताई खुशी

सौराष्ट्र की टीम को पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब दिलाने के बाद टीम के कप्तान जयदेव उनाद्कट ने कहा कि सात दशक बाद हमने पहली बार यह ट्रॉफी जीती है। हमारे लिए इससे ज्यादा खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती है। पिछले आठ सालों में यह हमारा चौथा फाइनल मैच था। यह दिखाता है कि हमने पिछले कुछ समय में कैसी क्रिकेट खेली है।










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