Sharp tremors of 5.8 magnitude earthquake on Iran-Turkey border, no casualties

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अंकरा। तुर्की-ईरान बॉर्डर ( Turkey-Iran border region ) के करीब ईरान के उत्तरपश्चिम क्षेत्र के अजरबैजान प्रांत ( Azerbaijan Province ) में रविवार को भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। इस प्राकृतिक घटना में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है।

ईरान के सालामास शहर से 35 किमी दक्षिणपूर्व में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया। पश्चिम अजरबैजान प्रांत तुर्की और इराक की सीमा पर स्थित है।

ईरानी सीस्मोलॉजिकल सेंटर (IRSC) के अनुसार, स्थानीय समयानुसार 9:24 am (सुबह 0622GMT) पर भूकंप के झटके आए। IRSC के अनुसार भूकंप का केंद्र 6 किलोमीटर (3.7 मील) गहराई में था।

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वहीं, यूरोपियन मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर ( EMSC ) ने जानकारी देते हुए बताया कि भूकंप के झटके येरेवन में साथ ही आर्मेनिया के अरेट और साइकिक प्रांत में भी महसूस किए गए। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के इस झटके से सात लोगों की मौत हो गई।

कोई हताहत नहीं

EMSC के अनुसार, 5 किमी (3.1 मील) की गहराई में भूकंप का केंद्र था। अधिकारियों ने बताया कि बचानव टीमों को उस इलाके में भेजा गया है जहां पर भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। अधिकारी ने कहा कि भूकंप खोय, उर्मिया और सलामास सहित कई शहरों में महसूस किया गया। उन्होंने कहा कि ईरान में लगभग 43 गाँव प्रभावित हुए।

स्थानीय मीडिया ने बताया कि ईरान के पश्चिम अजरबैजान प्रांत में घनी आबादी वाले क्षेत्र में यह भूकंप आया। भूकंप के झटके आने के बाद आम लोगों में भय देखने को मिला। लोग फौरन अपने घरों से निकल कर सड़कों पर आ गए। बता दें कि ईरान-तुर्की की सीमा दुनिया के भूकंप संभावित क्षेत्रों में से एक है।

क्यों आता है भूकंप?

आपको बता दें कि आम भाषा में कहें तो पृथ्वी के अंदर तेज हलचल होने की वजह से भूकंप आते हैं। पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है।

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बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। पृथ्वी की आतंरिक परत में हलचल होने से उत्पन ऊर्जा के परिणाम स्वरूप भूकंप आता है। ये ऊर्जा पृथ्वी की ऊपरी सतह पर भूकंपी तरंगे उत्पन करती हैं, जिससे धरती में कंपन होता है।

क्‍या है रिक्टर स्केल?

आपको बता दें कि भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल भी कहा जाता है। भूकंप की तरंगों या तीव्रता को रिक्टर स्केल पर 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है।

रिक्टर स्केल पैमाने को सन 1935 में कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था। यदि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 8 से ज्यादा होता है तो भारी तबाही होती है।

तबाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 8 या उससे अधिक की तीव्रता के भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

भूकंप आने पर कैसे करें बचाव

– भूकंप आने पर खुले स्थान पर जाएं, पेड़ व बिजली की लाइनों से दूर रहें।
– अगर आप गाड़ी चला रहे हैं तो याद रखें कि जहां भी हैं वहीं पर खड़े हो जाएं। अगर पास में कोई पेड़, फ्लाईओवर या पुल है तो उससे दूर रहें।

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– भूकंप अपने पर लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें।
– भूकंप आने पर बिजली और गैस बंद कर दें।
– आपदा किट बनाएं जिसमें रेडियो, मोबाइल, जरूरी कागजाजत, टार्च, माचिस, चप्पल, मोमबत्ती, कुछ पैसे और जरूरी दवाएं हों।
– भूकंपरोधी मकान का निर्माण करवाएं।

दुनियाभर में आए अब तक के पांच सबसे शक्तिशाली भूंकप

26 जनवरी 2001: भारत के गुजरात में 7.9 रिक्टर स्केल तीव्रता वाला शक्तिशाली भूकंप आया था जिसमें 30000 हजार लोग मारे गए और लगभग 10 लाख लोग बेघर हो गए।

17 अगस्त 1999 : तुर्की की राधानी इंस्तांबूल और इमिट शहरों में 7.4 रिक्टर स्केल की तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप में 70000 से अधिक लोग मारे गए और हजारों घायल हुए।

1990: ईरान के उत्तरी राज्य गिलान में आए शक्तिशाली भूकंप ने 40000 से भी अधिक लोगों की जान ले ली और कई ताबह हो गए।

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दिसंबर 1988: आर्मेनिया के उत्तर-पश्चिम में 6.9 रिक्टर स्केल तीव्रता का यह भूकंप आया था जिसमें 25000 लोगों की जाने गई थी।

1923: जापान की राजधानी टोक्यो में ग्रेट कांटो नाम का यह शक्तिशाली भूकंप आया था जिसमें 142800 लोगों की जान चली गई थी।

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