Tooth Plaque Causes Prevention and Treatments

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कई बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं और इसका मुख्य कारण होता है कि दांतों का बचपन से ही सही ख्याल न रखा जाना। बच्चों के टेढ़े-मेढ़े दांत की वजह प्राकृतिक या आनुवंशिक हो सकती है लेकिन कई बार लापरवाही के कारण भी ये स्थिति हो सकती है। उन बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े ज्यादा होते हैं जो बोतल से दूध पीते हैं, क्योंकि इससे दांतों के आकार में बदलाव आ जाता है। लंबे समय तक अंगूठा चूसने की आदत जारी रहे तो यह स्थिति हो सकती है। बड़े होने पर उनके दांत जबड़े और मुंह से बाहर निकलने लगते हैं। कारण यही है कि ऐसा करने से जबड़े के आकार में बदलाव होने लगता है। पेसिफायर के लंबे समय तक इस्तेमाल से भी दांत टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं। इसलिए 3 साल की उम्र के बाद बच्चों को इसकी आदत छुड़वा देना बेहतर होता है। एलर्जी, टॉन्सिल या फिर मुंह से सांस लेने की आदत से भी यही स्थिति पैदा होती है। बच्चे को किसी तरह की चोट लगने से जबड़े के आकार में परिवर्तन भी हो सकता है, तब भी ऐसे दांत निकल सकते हैं। दूध के दांत यदि समय से पहले या देर से गिरते हैं तो स्थायी दांत टेढ़े-मेढ़े भी जम सकते हैं।

दांत टेढ़े-मेढ़े हों तो इनकी सफाई भी अच्छे से नहीं हो पाती और इससे पायरिया रोग हो सकता है। इस रोग में हड्डी गल जाती है और दांत ढीले होकर गिर जाते हैं। दांतों के टेढ़े-मेढ़े होने पर इस समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि बड़े होने पर कई बार बच्चे हीनभावना से ग्रस्त हो जाते हैं। भोजन चबाने में दिक्कत होती है। दांतों की समस्या हो भी तो बच्चों को 7-8 साल की उम्र में डेन्टिस्ट को दिखा देना चाहिए। इस उम्र में उनके दातों का विकास हो रहा होता है, जिससे आकार देने में आसानी रहती है। दांत व जबड़ों की स्थिति देखकर ब्रेसेज या अन्य तरीके अपनाए जाते हैं और इलाज की सही उम्र तय की जाती है। www.myupchar.com से जुड़े डॉ. राजी एहसान का कहना है कि दांतों को साल में कम से कम दो बार डेंटिस्ट या डेंटल हाइजिनिस्ट से सफाई करवाएं। ऐसा करने से दांतों में सड़न और मसूड़ों से जुड़ी अन्य बीमारियों के खिलाफ लड़ने में आसानी होती है।

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बेहतर है कि बचपन से ही बच्चों के दांतों की केयर करना चाहिए और इनके टेढ़े-मेढ़े होने के कारणों से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि बच्चों को बोतल से लंबे समय तक दूध न पिलाएं, अंगूठा चूसने की आदत जल्द छुड़वा दें, 3 साल से बड़े बच्चों को पेसिफायर नहीं दें। डॉक्टर से समय-समय पर डेंटल चेकअप करवाते रहें। रोजाना अच्छे से ब्रश करवाएं। कई बार मांए छोटा बच्चा है, समझकर ब्रश नियमित रूप से नहीं करवाती। छोटे बच्चे कई बार ब्रश करने से बचते फिरते हैं, लेकिन इससे दांतों को नुकसान ही होगा। ये न सोचें कि दूध के दांत हैं टूट जाएंगे फिर नए आएंगे। नए दांतों का स्वास्थ्य दूध के दांतों पर भी निर्भर करता है। www.myupchar.com से जुड़ी एम्स की डॉ. वीके राजलक्ष्मी का कहना है कि अगर दांत के मैल को नियमित रूप से ब्रश करके साफ न किया जाए तो दांत के मैल में पाए जाने वाले बैक्टीरिया सड़न और मसूड़ों के रोग पैदा करते हैं।

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स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं


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