Turkey claims to have killed 45 Syrian soldiers in retaliation, increased tension in the area

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अंकारा। सीरिया ( Syria ) के इदलिब प्रांत ( Idlib Province ) में हवाई हमले में रूसी सैनिकों की ओर से तुर्की के 33 सैनिक मारे जाने के बाद अब तुर्की ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुिए सीरिया के 45 सैनिकों को मारने का दावा किया है।

इदलिब प्रांत में रूसी और तुर्की सेना ( Russian and Turkish Troops ) आमने-सामने आ गई है, जिसकी वजह से तनाव चरम पर पहुंच गया है। ऐसे में एक बार फिर से इलाके में तनाव बढ़ गया है और संकट गहराता जा रहा है।

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बता दें कि सीरिया के बशर-अल-असद सरकार ( Syrian Bashar-al-Assad Government ) को रूस का समर्थन हासिल है। रूसी सेना राष्ट्रपति असद के विरोधी लड़ाकों के खिलाफ इस अभियान में शामिल है, जबकि तुर्की ठीक इसके उलट विद्रोही समूहों की ओर से लड़ाई लड़ रहा है।

असद सरकार पूरे सीरिया में नियंत्रण के लिए इदलिब पर भी पूरी तरह से नियंत्रण करना चाहता है, लेकिन तुर्की सैनिकों की मौजूदगी की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है। तनाव पूर्ण माहौल के बीच तुर्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इदलिब को नो फ्लाई जोन घोषित करने की मांग की है।

रूस ने भेजे दो जंगी जहाज

आपको बता दें कि गुरुवार को तुर्की सैनिकों के हमले के जवाब में रूसी सैनिकों ने हवाई हमला करते हुए तुर्की के 33 सैनिकों को मार गिराया था। अब तुर्की ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सीरिया के 45 सैनिकों को मारने का दावा किया है। इसके बाद से इलाके में तनाव काफी गहरा गया है।

इस बीच तनाव बढ़ते देख रूस ने कहा है कि उसके दो जंगी जहाज इस्तांबुल के नजदीक है। इधर संयुक्त राष्ट्र में रूस के दूत वेस्ली नेबिजिया ने सुरक्षा परिषद को बताया कि वह इदलिब में तनाव कम करने के लिए तैयार है, बशर्ते कोई इसकी पहल करे।

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रूसी हमले से तिलमिलाए तुर्की ने यूरोपीय देशों को धमकी देते हुए कहा है कि यदि जल्द हालात ठीक नहीं हुए तो यूरोप में प्रवासियों की बाढ़ ला देगा। बता दें कि सीरिया युद्ध के दौरान लाखों प्रवासी तुर्की और आस-पास के यूरोपीय देशों में आ गए थे। मौजूदा समय में करीब 40 लाख सीरियाई शर्णार्थी तुर्की में हैं।

तुर्की ने धमकी देते हुए कहा कि अगर यूरोपीय यूनियन अपने समझौते पर कायम नहीं रहता है तो वह शरणार्थियों को यूरोप जाने के लिए अपना रास्ता खोल देगा। दूसरी तरफ हालात को लेकर यूरोपीय यूनियन ने तुर्की से कहा है कि वह 2016 में किए गए शरणार्थी समझौते पर कायम रहे। मालूम हो कि इस समझौते के तहत यूरोपीय देशों ने तुर्की को 6 अरब यूरो दिया था, ताकि शरणार्थी यूरोपीय देशों में न आने पाए।

पुतिन ने एर्दोगन से फोन पर की बात

सीरिया में बिगड़ते हालात को देखते ही रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ( President Vladimir Putin ) ने तुर्की के राष्ट्रपति रैसेप तैयप एर्दोगान ( Turkish President Recep Tayyip Erdogan ) से फोन पर बात की। दोनों ने तनाव कम करने पर बातचीत की। इस दौरान मौजूदा हालात को लेकर दोनों देशों ने गंभीर चिंता भी व्यक्त की। माना जा रहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति अगले महीने मॉस्को के दौरे पर जा सकते हैं।

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गौरतलब है कि तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लू से फोन पर हुई बातचीत में नाटो महासचिव ने इदलिब प्रांत में सीरिया सरकार और उसके सहयोगी रूस के अंधाधुंध हवाई हमलों की निंदा की। तुर्की ने इदलिब में उसकी पर्यवेक्षक चौकियों से सैनिकों को हटाने का सीरिया सरकार से अनुरोध किया जबकि मॉस्को ने अंकारा पर सीरिया में ‘आतंकवादियों’ को मदद पहुंचाने का आरोप लगाया है।

अमरीका ने तुर्की का किया समर्थन

सीरिया में 2011 से चल रहे संघर्ष के बीच 2018 में एक समझौता हुआ था, जिसके अनुसार रूस को इदलिब प्रांत में शांति लानी थी। तुर्की ने उस क्षेत्र में 12 पर्यवेक्षक चौकियां बनाई है, जिसपर सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना हमला करती रही है।

इधर तुर्की सैनिकों पर हुए हमले के बाद से इस महीने अब तक इदलिब मनें 53 तुर्की सैनिकों की मौत हो चुकी है। इसको लेकर अमरीका ने सीरियाई सरकार और उसके सहयोगी रूस से कहा है कि इस हमले को बंद करें।

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अमरीका ने तुर्की का समर्थन किया है और कहा है कि हम अपने नाटो सहयोगी तुर्की के साथ हैं तथा असद सरकार, रूस व ईरान समर्थित बलों के इस घिनौने अभियान को फौरन खत्म करने की मांग करते रहेंगे। फिलहाल इन विकल्पों पर गौर किया जा रहा है कि कैसे इस संकट में तुर्की को सहयोग दिया जा सकता है।

मालूम हो कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मसले पर चिंता जाहिर की है और सीरिया में चल रहे संघर्ष को लेकर सभी पक्षों से तत्काल सीजफायर करने का अह्वान किया है।

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