United Nations praised India efforts to stop the spread of corona virus

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संयुक्त राष्ट्र के एशिया प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनइस्केप) ने कोरोना वायरस के मद्देनजर भारत द्वारा उठाए गए कदमों की तारीफ की है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए यूएनइस्केप का वर्ष 2020 का आर्थिक एवं सामाजिक सर्वेक्षण जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस के कारण मौजूदा वित्त वर्ष में क्षेत्र आर्थिक मंदी से इनकार नहीं किया जा सकता। संस्था ने बुधवार को पेश प्रस्तुतिकरण में आर्थिक विकास दर के बारे में कोई अनुमान जारी नहीं किया, लेकिन कहा है कि अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट देखी जा सकती है। हालाँकि 10 मार्च की स्थिति के आधार पर तैयार लिखित रिपोर्ट में भारत की विकास दर 2019-20 के पाँच फीसदी से घटकर चालू वित्त वर्ष में 4.8 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में सुधरकर 5.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जारी किया गया है। 

भारत की नीति अब तक सही दिशा में

इस मौके पर यूएनइस्केप के वृदह नीति एवं विकास-वित्त पोषण विभाग की प्रमुख श्वेता सक्सेना ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा,“भारत की नीति अब तक सही दिशा में जा रही है। पूरे देश में लॉकडाउन किया गया है। कोरोना से उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के एक प्रतिशत के बराबर की राशि का प्रावधान किया है। पिछले दिनों रिजर्व बैंक ने भी नीतिगत उपायों की घोषणा की है।” उन्होंने कहा कि जहाँ तक यह प्रश्न है कि क्या और ज्यादा करने की जरूरत है तो आगे जैसी स्थिति होगी सरकार उसके हिसाब से कदम उठा सकती है। 

कोरोना के बाद पूरी तरह बदल गई है स्थिति

विभाग के निदेशक हमजा अली मलिक ने कहा कि सरकारों को बड़े पैमाने पर और लक्षित उपाय करने की जरूरत है। गरीबों और हासिये पर जी रहे लोगों की निश्चित आमदनी सुनिश्चित की जाये। उन्हें वित्तीय घाटा बढ़ने की कीमत पर भी स्वास्थ्य पर निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा,“ ‘कोविड-19’ के मद्देनजर नीतियों में अर्थव्यवस्था को दुबारा पटरी पर लाने से अधिक लोगों को प्राथमिकता देनी होगी। सरकारों को स्वास्थ्य आपात तंत्र में निवेश करने की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है और हर दिन बदल रही है। इसलिए यूएनइस्केप अभी किसी भी देश के बारे में कोई विकास अनुमान जारी नहीं कर रहा है।

2008-09 की आर्थिक मंदी से भी बड़ी मंदी

एक प्रश्न के उत्तर में मलिक ने कहा कि कोविड-19 का प्रभाव काफी वृहद होगा। हमने इससे पहले कभी इस तरह की समस्या का सामना नहीं किया है। इसका अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर होगा। यह वर्ष 2008-09 की आर्थिक मंदी से भी बड़ा हो सकता है। समाज के हाशिये पर खड़े लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। उन्हें हमारे सहारे की जरूरत है।  उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों को अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाने के उपाय करने चाहिए, और वे ऐसा कर भी रहे हैं। इस समय लोगों की जिंदगी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। एक बार महामारी पर काबू पा लिया जाता है, उसके बाद हम निवेश बढ़ाने के उपायों के बारे में सोच सकते हैं।

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यह अभूतपूर्व संकट हैं और इसलिए इससे निपटने के उपाय भी अभूतपूर्व होंगे। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से हमारे लिए अवसर भी है। हमें अपनी नीतियाँ इस प्रकार तैयार करनी चाहिए जो सतत विकास की ओर ले जाती हो। कोरोना के बाद की दुनिया पहले जैसी नहीं रह जायेगी। हम घर से काम कर रहे हैं और हमने ऐसा करना सीख लिया है।  सक्सेना ने कहा कि कोविड-19 के कारण सतत विकास लक्ष्यों को गति मिलेगी। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छता और पयार्वरण के लक्ष्यों की पूर्ति में तेजी देखी जायेगी। 


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