Us Sanctions On Sri Lankan Army Chief Shavendra Silva – सेना प्रमुख पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर श्रीलंका ने जताई सख्त आपत्ति

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श्री लंका सेना प्रमुख शवेंद्र सिल्वा
– फोटो : Social Media

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श्रीलंकाई सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शावेंद्रा सिल्वा और उनके परिवार पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर श्रीलंका ने सख्त आपत्ति जताई है। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने कहा, हमारी सरकार को असत्यापित जानकारी के आधार पर लेफ्टिनेंट जनरल सिल्वा और उनके परिजनों पर लगे यात्रा प्रतिबंध को लेकर सख्त आपत्ति है।

सरकार ने दोहराया है कि लेफ्टिनेंट जनरल सिल्वा को उनकी वरिष्ठता के आधार पर सेना के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था और उनके खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के कोई आरोप सिद्ध नहीं हुए। श्रीलंका ने अमेरिका से सूचना की प्रामाणिकता को जांचने और अपने निर्णय की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

बता दें कि 2009 में लिट्टे के खिलाफ से की लड़ाई में सिल्वा पर कमांडिंग अफसर रहते हुए कई आरोप लगे थे। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि 2009 में श्रीलंका में गृहयुद्ध के अंतिम चरण में सेना ने अतिरिक्त हत्याओं को अंजाम दिया।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों के दस्तावेजों के तहत सिल्वा के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप गंभीर और विश्वसनीय हैं। पिछले साल अगस्त में सिल्वा को देश का सेना प्रमुख बनाया गया था। इस फैसले की अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने तीखी आलोचना की थी।

2009 में 58वें डिविजन की कमान संभाली थी

सिल्वा ने 2009 में गृह युद्ध के अंतिम दौर में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के विद्रोहियों के खिलाफ जंग में सेना के 58वें डिविजन की कमान संभाली थी। उनकी ब्रिगेड पर आम नागरिकों, अस्पतालों और फंसे हुए तमिल नागरिकों को की जा रही रसद आपूर्ति रोकने का भी आरोप है।

इससे पहले अमेरिकी दूतावास ने सिल्वा की नियुक्ति पर गहरी चिंता जाहिर की थी। दूतावास ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य संगठनों द्वारा उनके खिलाफ मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के प्रमाणित हुए आरोप गंभीर एवं विश्वसनीय हैं।

यह नियुक्ति श्रीलंका की अंतरराष्ट्रीय साख और न्याय एवं जवाबदेही को प्रोत्साहित करने की उसकी प्रतिबद्धता को कमतर बताती है खास कर ऐसे समय में जब पुन: मैत्री और सामाजिक एकता की जरूरत सर्वाधिक है। 

श्रीलंकाई सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शावेंद्रा सिल्वा और उनके परिवार पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर श्रीलंका ने सख्त आपत्ति जताई है। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने कहा, हमारी सरकार को असत्यापित जानकारी के आधार पर लेफ्टिनेंट जनरल सिल्वा और उनके परिजनों पर लगे यात्रा प्रतिबंध को लेकर सख्त आपत्ति है।

सरकार ने दोहराया है कि लेफ्टिनेंट जनरल सिल्वा को उनकी वरिष्ठता के आधार पर सेना के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था और उनके खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के कोई आरोप सिद्ध नहीं हुए। श्रीलंका ने अमेरिका से सूचना की प्रामाणिकता को जांचने और अपने निर्णय की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

बता दें कि 2009 में लिट्टे के खिलाफ से की लड़ाई में सिल्वा पर कमांडिंग अफसर रहते हुए कई आरोप लगे थे। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि 2009 में श्रीलंका में गृहयुद्ध के अंतिम चरण में सेना ने अतिरिक्त हत्याओं को अंजाम दिया।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों के दस्तावेजों के तहत सिल्वा के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप गंभीर और विश्वसनीय हैं। पिछले साल अगस्त में सिल्वा को देश का सेना प्रमुख बनाया गया था। इस फैसले की अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने तीखी आलोचना की थी।

2009 में 58वें डिविजन की कमान संभाली थी

सिल्वा ने 2009 में गृह युद्ध के अंतिम दौर में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के विद्रोहियों के खिलाफ जंग में सेना के 58वें डिविजन की कमान संभाली थी। उनकी ब्रिगेड पर आम नागरिकों, अस्पतालों और फंसे हुए तमिल नागरिकों को की जा रही रसद आपूर्ति रोकने का भी आरोप है।

इससे पहले अमेरिकी दूतावास ने सिल्वा की नियुक्ति पर गहरी चिंता जाहिर की थी। दूतावास ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य संगठनों द्वारा उनके खिलाफ मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के प्रमाणित हुए आरोप गंभीर एवं विश्वसनीय हैं।

यह नियुक्ति श्रीलंका की अंतरराष्ट्रीय साख और न्याय एवं जवाबदेही को प्रोत्साहित करने की उसकी प्रतिबद्धता को कमतर बताती है खास कर ऐसे समय में जब पुन: मैत्री और सामाजिक एकता की जरूरत सर्वाधिक है। 


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