video- iInspection 21 times in a year, yet the condition of hospitals

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कहीं चिकित्सक नदारद तो कहीं संसाधनों का उपयोग नहीं

कहीं चिकित्सक नदारद तो कहीं संसाधनों का उपयोग नहीं
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से किए गए औचक निरीक्षण में मिली अनियमिताएं
प्राधिकरण के निर्देशों पर भी नहीं हो रहा सुधार
उच्चाधिकारियों और निदेशालय को कार्रवाई के लिए लिखा
दूरस्थ इलाकों में नहीं मिल पा रहा समुचित लाभ
प्रतापगढ़
जिले में एक तरफ चिकित्साकर्मियों की कमी है। वहीं भौतिक संसाधनों का अभाव है तो कई स्थानों पर इनका समुचित उपयोग तक नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कई बार चिकित्सक समय पर नहीं मिलते है। ज्यादा खराब हालत आदिवासी जिले के दूरस्थ इलाकों में देखी जा सकती है। ऐसे में निरीक्षण के बाद निर्देश मिलने पर भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा है।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर रिट में पारित आदेश व निर्देश के मुताबिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतापगढ़ के सचिव तथा अपर जिला न्यायाधीश लक्ष्मीकांत वैष्णव ने जिले में 21 स्वास्थ्य केन्द्रों पर औचक निरीक्षण किया था। जिसमें कमियों और सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग को लिखा और निर्देश दिए गए थे। लेकिन कई स्वास्थ्य केन्द्रों पर कोई सुधार नहीं होना सामने आया। इस पर प्राधिकरण की ओर से विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर औचक निरीक्षण किए जाते है। इनमें संस्थानों पर ठहराव, रोगियों को मिलने वाली सेवाओं, लाभ आदि को लेकर जांच की जाती है। जिस पर कमियों को लेकर सुधार के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को भी लिखा जाता है। लेकिन यहां जिले में अधिकांश जांच रिपोर्ट के बाद लिए गए फीडबैक में सुधार नहीं पाया गया है। जिससे उच्चाधिकारियों को लिखा है।
जिले में इन केन्द्रों पर यह मिले थे हालात
जिले के दूरस्थ इलाकों में हालात में कोई सुधार नहीं पाया गया। पीपलखूंट स्वास्थ्य केन्द्र का 16 दिसंबर 2019 को निरीक्षण किया गया था। जहां प्रसुताओं को बिस्किट, दूध और अन्य सुविधाओं का अभाव पाया गया था। चिकित्सक भी समय पर नहीं मिले थे। इस पर मुख्य चिकित्साधिकारी को व्यवस्थाओं में सुधार के लिए लिखा था। लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जबकि घंटाली पीएचसी में एक ही दिन में 18 डिलेवरी होना पाई गई। इस दौरान एक ही चिकित्सक मिला था। स्थिति को देखते हुए यहां चार चिकित्सक, एक महिला चिकित्सक के लिए विभाग को लिखा था। धरियावद में औसत साढ़े 6 सौ रोगी पहुंचते है। लेकिन यहां चिकित्सकों की काफी कमी है। रामपुरिया और अचनेरा पीएचसी पर भी हालात खराब है। आम्बीरामा में सेवाएं संतोषजनक मिली। जिला चिकित्सालय में निरीक्षण में भी सेवाएं सुचारू मिली। लेकिन यहां विश्रांति गृह सुचारू नहीं मिला। इससे सुधार के लिए निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की नितांत आवश्यकता
आदिवासी बाहुल्य इलाके में सरकार की ओर से दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं में नितांत आवश्यकता है। यहां प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और कमी के चलते लोगों को सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जहां चिकित्सक है, वहां भी गायब मिले है। ऐसे में झोलाछाप का दबदबा बढ़ता जा रहा है। निरीक्षण के बाद सुधार के निर्देश पर भी विभागीय अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण में लीपापोती की जाती है। जिससे सुधार नहीं हो पा रहा है। आमजन को वास्तविक सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।
लक्ष्मीकांत वैष्णव
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव व अपर जिला न्यायाधीश, प्रतापगढ़




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